
इंदौर। बीआरटीएस के कॉरिडोर पर बने हुए 19 बस स्टॉप तोडऩे के लिए 10 ठेकेदार एजेंसी तैयार है। इसके साथ ही इसके एक तरफ की बची हुई रैलिंग और बीम को तोडऩे के लिए भी पांच ठेकेदार एजेंसी आगे आई हैं। 1 साल पहले बीआरटीएस को हटाने का जो फैसला लिया गया था, उसका क्रियान्वयन अभी तक पूर्ण रूप से नहीं हो सका है। इस कॉरिडोर से रैलिंग, बीम और बस स्टॉप तोडऩे का ठेका लेने वाली एजेंसी भाग गई है। इसके बाद इस एजेंसी द्वारा तय की गई दर पर निगम द्वारा दूसरे ठेकेदार से काम करने की कोशिश की गई, लेकिन यह कोशिश नाकाम रही।
ऐसी स्थिति में नगर निगम के सामने यह समस्या पैदा हो गई थी कि इस कॉरिडोर की एक तरफ की रैलिंग और बीम तो तोड़े जा चुके हैं, लेकिन दूसरी तरफ तोडऩे का काम कैसे कराया जाए। पिछले दिनों नगर निगम द्वारा इस कार्य को करने के लिए ठेकेदार एजेंसी को चयनित करने हेतु नए सिरे से टेंडर जारी किया गया था। इस टेंडर में इस काम को लेने के लिए ठेकेदार तैयार हो जाए, इसके लिए निगम के अधिकारियों द्वारा पहले से ठेकेदारों से चर्चा कर ली गई। ठेकेदारों को यह काम करने के लिए राजी भी कर लिया गया था। व्यवस्था में बदलाव करते हुए निगम द्वारा यह प्रावधान किया गया था कि इस बार ठेका किसी एक ठेकेदार को नहीं दिया जाएगा, बल्कि इस काम को करने वाली एजेंसियों को इन पैनल कर लिया जाएगा। फिर एक निश्चित दर पर सभी एजेंसियों से काम कराया जा सकेगा।
निगम द्वारा जारी किए गए टेंडर को खोल लिया गया है। इस कॉरिडोर में बने हुए 19 बस स्टॉप को तोडऩे का काम करने के लिए 10 ठेकेदार एजेंसी आगे आई हैं। निगम द्वारा एक बस स्टॉप के लिए 6.86 लाख रुपए की राशि व 6.10 लाख प्रतिबस स्टॉप है। इसमें यह प्रक्रिया है कि ठेकेदार एजेंसी तोडऩे के साथ में निकलने वाले मलबे को खुद ले जाएगी और निगम को पैसा देगी। निगम द्वारा निश्चित की गई कीमत से थोड़ी कम कीमत का ऑफर निगम को प्राप्त हुआ है। इसके अलावा एक साइड की बची हुई रैलिंग और उसके नीचे बना हुआ बीम तोडऩे के काम के लिए भी पांच एजेंसी आगे आई हैं। निगम के द्वारा इस कार्य के लिए 575 रुपए प्रति रनिंग मीटर का रेट रखा गया था। इसमें भी यही प्रक्रिया थी कि तोडफ़ोड़ करने वाली एजेंसी द्वारा तोडफ़ोड़ करने के साथ मलबा ले जाया जाएगा।ॉ
इसके एवज में नगर निगम को इस दर से भुगतान किया जाएगा। इसमें ठेकेदारों द्वारा अधिकतम दर 510 रुपए प्रति रनिंग मीटर की डाली गई है। निगम के अधिकारियों का कहना है कि दर तो निगम द्वारा तय की गई राशि से कम की आई है। इसे महापौर परिषद की बैठक में रखकर मंजूरी दिलवाई जाएगी। जितने ठेकेदारों द्वारा टेंडर भरा गया है, उन सभी को अलग-अलग स्थान का काम सौंपते हुए कम से कम समय में यह काम पूरा कराया जाएगा।
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