
बालाघाट। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। कस्तूरबा गांधी गर्ल्स हॉस्टल (Kasturba Gandhi Girls Hostel) में रहने वाली 13 साल की लड़की (13 Year Old Girl) ने बच्ची को जन्म दिया है। इस मामले ने ग्रामीण और आदिवासी इलाकों की लड़कियों की मदद के लिए बनाए गए रेजिडेंशियल हॉस्टलों में सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले (Balaghat District) के बैहर डेवलपमेंट ब्लॉक के परसामऊ गांव में कस्तूरबा गांधी गर्ल्स हॉस्टल में रहने वाली 13 साल की लड़की ने इस हफ्ते जिला अस्पताल के मैटरनिटी वार्ड में एक बच्ची को जन्म दिया। 8वीं की छात्रा की हालत बिगड़ने पर उसे गढ़ी अस्पताल में भर्ती कराया गया। मेडिकल जांच में पता चला कि वह एडवांस प्रेग्नेंसी में थी, जिसके बाद उसने एक बच्ची को जन्म दिया। अस्पताल अधिकारियों ने पुलिस को सूचना दी। इसके बाद महिला पुलिस थाने ने कार्रवाई शुरू की।
मामले की जांच बाद में गढ़ी थाने को सौंप दी गई, क्योंकि हॉस्टल उसी के अधिकार क्षेत्र में आता है। महिला पुलिस थाने की इंचार्ज किरण वरकाडे ने बताया कि अस्पताल से रिपोर्ट मिलते ही कानूनी कार्रवाई तुरंत शुरू कर दी गई। एक संदिग्ध, जो कथित घटना के समय नाबालिग था और अब 18 साल का है, उसे हिरासत में ले लिया गया है। पीड़िता ने आरोपी की पहचान अपने गांव के रहने वाले के रूप में की है।
बताया जा रहा है कि लड़की की मां ने उसके शरीर की बदलावों पर ध्यान नहीं दे पाईं। हॉस्टल के वार्डन ने पुलिस को बताया कि लड़की अप्रैल की छुट्टियों के दौरान घर लौटी थी। माना जा रहा है कि वहीं यह घटना हुई थी। जांच अधिकारी के मुताबिक, वार्डन ने बताया कि कोई भी साफ संकेत न होने के बावजूद कोई शक पैदा नहीं हुआ। आदिवासी मामलों के विभाग की असिस्टेंट कमिश्नर शकुंतला डामोर ने गंभीर लापरवाही का हवाला देते हुए हॉस्टल सुपरिटेंडेंट चैनबती सैयाम को तुरंत सस्पेंड करने का आदेश जारी किया।
ऑर्डर में कहा गया है कि पहली नजर में ऐसा लगता है कि जब छात्रा की तबीयत खराब हुई तो हॉस्टल वार्डन ने न तो चिंता दिखाई और न ही उन्होंने छात्रा के लिए अलग से मेडिकल जांच का इंतजाम किया। इसके अलावा, छात्रा के बार-बार अनुपस्थित रहने के बावजूद उसकी गैरमौजूदगी या सेहत के बारे में माता-पिता से कोई संपर्क नहीं किया गया।
इससे पता चलता है कि सरकारी प्राइमरी स्कूल खजरा की प्राइमरी टीचर और कस्तूरबा गांधी गर्ल्स हॉस्टल, परसमाऊ की वार्डन चैनबती सैयाम ने हॉस्टल मैनेजमेंट की अपनी ड्यूटी पूरी नहीं की। जांच में इस बात की पुष्टि हुई कि लड़की की बिगड़ती सेहत के साफ संकेतों को नजरअंदाज़ किया गया। कोई खास मेडिकल जांच का इंतजाम नहीं किया गया और माता-पिता को उसकी बीमारी या बार-बार स्कूल से गैरहाजिर रहने के बारे में तुरंत जानकारी नहीं दी गई। पुलिस अधिकारी मामले की जांच कर रहे हैं।
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