
नई दिल्ली। टी20 विश्व कप(T20 World Cup) में भारत की शानदार जीत (India’s stunning victory)के बाद जहां पूरे देश में जश्न का माहौल है, वहीं ट्रॉफी को मंदिर ले जाने को लेकर नया विवाद भी सामने आ गया है। अहमदाबाद के Narendra Modi Stadium में खेले गए फाइनल मुकाबले में भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर खिताब अपने नाम किया। कप्तान Suryakumar Yadav की अगुआई में टीम इंडिया ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए इतिहास रचा।इस जीत के बाद खिलाड़ी जश्न में डूबे हुए थे। इसी बीच अगले दिन सूर्या, आईसीसी अध्यक्ष Jay Shah और टीम के मुख्य कोच Gautam Gambhir के साथ अहमदाबाद के हनुमान मंदिर पहुंचे। यहां कप्तान सूर्यकुमार यादव ट्रॉफी के साथ मंदिर में पूजा-अर्चना करते नजर आए। इस घटना की तस्वीरें और वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई।
कीर्ति आजाद ने आपत्ति जताई
1983 विश्व कप विजेता टीम के सदस्य और कांग्रेस के लोकसभा सांसद कीर्ति आजाद ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि टीम इंडिया पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती है, इसलिए ट्रॉफी को किसी एक धर्म से जोड़ना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि जब कपिल देव की कप्तानी में 1983 में भारत ने विश्व कप जीता था, तब टीम में हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी धर्मों के खिलाड़ी थे। उस समय टीम ने ट्रॉफी को पूरे देश की जीत के रूप में देखा था।
कीर्ति आजाद ने अपने पोस्ट में लिखा, “टीम इंडिया पर शर्म आती है। जब हमने 1983 में विश्व कप जीता था, तब हमारी टीम ने ट्रॉफी को पूरे भारत की जीत के रूप में देखा था। आज ट्रॉफी को मंदिर में क्यों ले जाया जा रहा है? अगर ऐसा है तो मस्जिद, चर्च या गुरुद्वारे में क्यों नहीं?” उनके इस बयान के बाद क्रिकेट और राजनीति दोनों ही हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
धर्म और राष्ट्रीय टीम पर उठ रहा सवाल
कीर्ति आजाद ने अपने बयान में यह भी कहा कि भारतीय टीम किसी एक व्यक्ति या परिवार की नहीं बल्कि पूरे देश की है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि टीम में अलग-अलग धर्मों के खिलाड़ी हैं, जैसे मोहम्मद सिराज और संजू सैमसन। उनके अनुसार अगर खिलाड़ी अपनी व्यक्तिगत आस्था के अनुसार किसी धार्मिक स्थल पर जाते हैं तो वह उनका निजी मामला है, लेकिन ट्रॉफी को किसी एक धार्मिक स्थल से जोड़कर विवाद को जन्म दे सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि टी20 विश्व कप में संजू सैमसन ने शानदार प्रदर्शन किया और उन्हें मैन ऑफ द टूर्नामेंट भी चुना गया। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अन्य खिलाड़ी भी ट्रॉफी को अपने-अपने धार्मिक स्थलों पर ले जा सकते हैं? उनके अनुसार यह ट्रॉफी 140 करोड़ भारतीयों की है और इसे किसी एक धर्म की जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पहले भी हो चुकी है ऐसी परंपरा
हालांकि यह पहली बार नहीं है जब भारतीय क्रिकेट टीम का कोई कप्तान ट्रॉफी के साथ मंदिर पहुंचा हो। इससे पहले रोहित शर्मा भी टी20 विश्व कप जीतने के बाद मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। उस समय उनके साथ जय शाह भी मौजूद थे और दोनों ने भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया था। ट्रॉफी को मंदिर में ले जाकर पूजा-अर्चना की गई थी और उसे फूलों की माला भी पहनाई गई थी।
क्रिकेट जगत में कई खिलाड़ी जीत के बाद अपने-अपने धार्मिक स्थलों पर जाकर आशीर्वाद ले रहे हैं। कुछ लोग इसे खिलाड़ियों की व्यक्तिगत आस्था बताते हैं, जबकि कुछ इसे राष्ट्रीय टीम के प्रतीक के रूप में देखते हुए अलग नजरिया रखते हैं।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
ट्रॉफी के साथ मंदिर जाने की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे खिलाड़ियों की श्रद्धा और परंपरा बता रहे हैं, तो कुछ इसे स्थिरता के नजरिए से देख रहे हैं। अगर यह मामला खेल और राजनीति दोनों क्षेत्रों में चर्चा का विषय बन गया है।
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