
नई दिल्ली। अदालतों में शौचालयों (Toilets) की स्थिति को लेकर देश के 20 उच्च न्यायालयों (High Courts) ने रिपोर्ट दाखिल नहीं की है। इसे लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने नाराजगी जाहिर की है। 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने देश की सभी अदालतों और न्यायाधिकरणों में शौचालय सुविधा मुहैया कराने के निर्देश दिए। साथ ही सभी उच्च न्यायालयों से रिपोर्ट मांगी थी। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने सख्त लहजे में कहा कि यह आखिरी मौका था। अगले आठ सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल न करने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उचित स्वच्छता तक पहुंच को मौलिक अधिकार माना गया है। कोर्ट ने उच्च न्यायालयों, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों से सभी न्यायालय परिसरों और न्यायाधिकरणों में पुरुषों, महिलाओं, दिव्यांगजनों और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए अलग-अलग शौचालयों की सुविधा सुनिश्चित करने को कहा था। कोर्ट ने चार महीने के भीतर स्थिति रिपोर्ट भी मांगी थी।
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