
नई दिल्ली ।आदित्य धर (Aditya Dhar) के निर्देशन में बनी फिल्म धुरंधर (stalwart) ने बॉक्स ऑफिस(box office) पर ऐतिहासिक सफलता हासिल कर हिंदी सिनेमा में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। 5 दिसंबर 2025 को रिलीज (Releasing on December 5, 2025) हुई इस फिल्म ने अपनी दमदार कहानी,(Powerful story) सशक्त अभिनय और भव्य प्रस्तुति से दर्शकों को गहराई तक प्रभावित किया। लेकिन इस फिल्म का एक सीन ऐसा था, जिसने न सिर्फ दर्शकों को झकझोरा बल्कि सेट पर मौजूद कलाकारों को भी भीतर तक तोड़ दिया। 26/11 मुंबई आतंकी हमले पर आधारित एक दृश्य की शूटिंग के बाद अक्षय खन्ना और अर्जुन रामपाल फूट-फूटकर रो पड़े थे। इस भावुक पल का खुलासा खुद आर माधवन ने एक इंटरव्यू में किया।
फिल्म में अक्षय खन्ना ने रहमान डकैत और अर्जुन रामपाल ने आईएसआई मेजर इकबाल का किरदार निभाया है। कहानी के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर 26/11 हमले को रीक्रिएट किया गया, जहां उनके किरदार इस हमले के बाद जश्न मनाते नजर आते हैं। भारतीय कलाकार होकर भारतीयों पर हुए आतंकी हमले का जश्न मनाने का अभिनय करना उनके लिए बेहद पीड़ादायक साबित हुआ। आर माधवन ने बताया कि सीन पूरा होते ही दोनों कलाकार भावनाओं से टूट गए और फूट-फूटकर रोने लगे।
माधवन के मुताबिक, यह उनके लिए महज अभिनय नहीं था। उन्होंने उन भयावह परिस्थितियों को महसूस किया, जिन्हें देश ने 26/11 के दौरान झेला था। उस त्रासदी की यादें आज भी लोगों के जेहन में ताजा हैं। जब कलाकारों को उस दर्दनाक घटना को उलट नजरिए से निभाना पड़ा, तो वे भावनात्मक रूप से खुद को संभाल नहीं पाए। सेट पर कुछ देर के लिए सन्नाटा और मातम जैसा माहौल छा गया था। उस क्षण ने यह एहसास कराया कि सिनेमा सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भावनाओं और वास्तविकताओं को जीने का सशक्त जरिया भी है।
‘धुरंधर’ में रणवीर सिंह मुख्य भूमिका में नजर आए हैं। उनके साथ संजय दत्त, सारा अर्जुन, अक्षय खन्ना, अर्जुन रामपाल, दानिश पंडोर, गौरव गेरा, सौम्या टंडन, राकेश बेदी और आर माधवन जैसे कलाकारों ने अपनी प्रभावशाली अदाकारी से फिल्म को ऊंचाई दी है। फिल्म के गीत-संगीत और एक्शन दृश्यों को भी खूब सराहा गया। इसकी कहानी और प्रस्तुति ने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है।
अब इस बहुचर्चित फिल्म का दूसरा भाग 19 मार्च को रिलीज होने जा रहा है, जिसे लेकर दर्शकों में जबरदस्त उत्साह है। ‘धुरंधर’ ने यह साबित कर दिया है कि जब कंटेंट मजबूत हो और कलाकार पूरी ईमानदारी से किरदार को जिएं, तो सिनेमा सिर्फ पर्दे पर नहीं, दिलों में उतर जाता है।
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