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टेक्सास में 90-फीट हनुमान प्रतिमा विवाद: नस्लीय टिप्पणी के बाद बढ़ा तनाव | NEWS RANNING मेटर

February 18, 2026

नई दिल्ली । शुगर लैंड,(Sugar Land) टेक्सास उत्तर अमेरिका की सबसे ऊंची हनुमान प्रतिमाओं में से एक, पंचलोहा (Panchaloha)अभय हनुमान नामक 90-फीट ऊंची प्रतिमा(90-feet tall statue), के परिसर में निजी जमीन पर स्थापित है। यह प्रतिमा अगस्त 2024 में मंदिर के विस्तृत समारोह में स्थापित की गई थी और स्थानीय हिन्दू समुदाय (Hindu community)के लिए शक्ति, भक्ति और शांति का प्रतीक(peace symbol) मानी जाती है।

मुद्दा तब तूल पकड़ गया जब टेक्सास स्थित एक रिपब्लिकन कार्यकर्ता कार्लोस टुर्सियोस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस प्रतिमा के बारे में पोस्ट साझा करते हुए जैसे नस्लीय और आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और यह दावा लगाया कि ये लोग अमेरिका में धीरे-धीरे क़ब्ज़ा कर रहे हैं। उनके कुछ समर्थकों ने खुले तौर पर जैसे आपत्तिजनक नारे भी लगाए, जो न केवल धार्मिक बल्कि आप्रवासी-विरोधी भावनाओं को भी उकसा रहे हैं।

भारतीय-अमेरिकी समुदाय और सोशल मीडिया पर कई उपयोगकर्ताओं ने टुर्सियोस के बयान की तीखी आलोचना की। उनका कहना है कि यह प्रतिमा private संपत्ति पर बनी है और इसे हिंदू समुदाय के श्रद्धा-भाव और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के तहत देखा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी धार्मिक प्रतीक को नस्लीय या सांस्कृतिक रूप से अनावश्यक रूप से निशाना बनाना गलत और असंवैधानिक है।

इस विवाद की पृष्ठभूमि में पहले भी इसी मंदिर परिसर में बने हनुमान प्रतिमा का विरोध कुछ समूहों ने किया था, जिसमें कुछ ने इसे “false god” या “demonic” जैसे अपमानजनक शब्दों से भी संबोधित किया था, जिससे पहले से ही सांस्कृतिक तनाव की पड़ताल हो रही थी।


  • सोशल मीडिया पर भी बहस दो अलग-अलग ध्रुवों में बंटी नजर आई एक तरफ ऐसे लोग हैं जिन्होंने टिप्पणी को धार्मिक और नस्लीय असहिष्णुता करार दिया, तथा दूसरी तरफ कुछ लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा मानते हुए देख रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह विवाद अमेरिका में धार्मिक विविधता, सामाजिक सहिष्णुता और संविधान द्वारा दिए गए धर्म की आज़ादी के अधिकारों के बीच चल रही बहस का प्रतिबिंब है।

    अब यह विवाद सिर्फ एक प्रतिमा को लेकर नहीं रह गया है, बल्कि धार्मिक विविधता, आप्रवास और सामुदायिक अधिकार जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा का हिस्सा बन चुका है, जो अमेरिका जैसे बहुसांस्कृतिक समाज में लगातार उभरते रहे हैं।

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