
इंदौर। अब बच्चों और माता-पिता के बीच एसडीएम एवं सामाजिक न्याय नि:शक्तजन कल्याण विभाग सेतु का काम करेगा। माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण अधिनियम के तहत गठित की गई समिति यदि सुलह नहीं करवा पाई तो एसडीएम जहां सख्त कार्रवाई करेंगे, वहीं पहली प्राथमिकता घर जोडऩे को दी जाएगी।
कलेक्टर मनीष सिंह ने भरण-पोषण अधिनियम के तहत जनसुनवाई, सीएम हेल्पलाइन में बढ़ रहे प्रकरणों को संज्ञान में लेते हुए बैठक आयोजित की। बैठक में बच्चों और माता-पिता के बीच अब अधिकारियों को सेतु बनने की सलाह दी गई है। कलेक्टर ने एसडीएम व सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वरिष्ठ नागरिकों को कोई भी परेशानी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाए, लेकिन पहली प्राथमिकता परिवारों को टूटने से बचाने की होनी चाहिए। जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन में आने वाली शिकायतों को संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए सुना जाए। वरिष्ठ नागरिकों की समिति और एसडीएम के बीच में तारतम्य बैठाने के निर्देश देते हुए कलेक्टर ने कहा कि ऐसे मामले, जिसमें बच्चों द्वारा माता-पिता को खाने-पीने और जरूरी बैसिक चीजों के लिए परेशान किया जा रहा है। उन पर समझाइश देकर कार्रवाई की जाए और न मानने की सूरत में सख्ती भी दिखाई जाए।
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