
अहमदाबाद। गुजरात (gujarat) में विधानसभा चुनाव (assembly elections) में अब महज 2 महीने की दूरी है। चुनाव तारीखों के ऐलान से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) (Bharatiya Janata Party (BJP), कांग्रेस (Congress) और आम आदमी पार्टी (आप) (Aam Aadmi Party (AAP)) ने पूरे दमखम से प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। लगातार 27 सालों से गुजरात में सरकार चला रही भाजपा का अब तक कांग्रेस से सीधा मुकाबला होता आया है, लेकिन इस बार ‘आप’ की एंट्री ने चुनाव को त्रिकोणीय और दिलचस्प बना दिया है। हालांकि, सी-वोटर के ताजा सर्वे में एक बार फिर यहां पूर्ण बहुमत से भाजपा सरकार बनने का अनुमान जताया गया है। पिछली बार भाजपा को कड़ी टक्कर देने में सफल रही कांग्रेस का ग्राफ गिरता दिख रहा है।
रविवार को पेश हुए एक सर्वे में कहा गया है कि 182 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा 135 से 143 सीटों पर कब्जा करके बंपर जीत हासिल कर सकती है। 2017 में 99 सीटें जीतने वाली कांग्रेस को 36 से 44 सीटों से ही संतोष करना पड़ेगा। ‘आप’ को महज 0-2 सीटें मिलने का अनुमान सर्वे में जताया गया है। हालांकि, वोट शेयर की बात करें तो ‘आप’ के लिए उत्साहजनक स्थिति है। सर्वे में कहा गया है कि पार्टी को 17.4 फीसदी वोट शेयर मिल सकता है। भाजपा को 46.8 और कांग्रेस को 32.3 फीसदी वोट मिलने की संभावना जताई गई है।
राष्ट्रीय पार्टी का मिल सकता है दर्जा
आम आदमी पार्टी का दावा है कि वह गुजरात में भाजपा और आप के बीच ही लड़ाई है। अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के तमाम नेता गुजरात में सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं। ‘आप’ के लिए सर्वे के नतीजे भले ही दावों से उलट हों, लेकिन यदि ओपनियन पोल के आंकड़े सच के करीब हुए तो भी ‘आप’ को कुछ फायदे हो सकते हैं। ‘आप’ को दिल्ली, पंजाब और गोवा में चुनाव आयोग प्रादेशिक पार्टी के रूप में दर्जा दे चुका है और यदि गुजरात में पार्टी 6 फीसदी से अधिक वोट शेयर हासिल करती है तो वहां भी यह दर्जा हासिल हो जाएगा। चार राज्यों में प्रादेशिक पार्टी का दर्जा मिलने के साथ ही ‘आप’ को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल जाएगा।
तीसरी ताकत की पहचान, गुजरात में पैर जमाने का मौका
यदि ‘आप’ गुजरात में 20 फीसदी के आसपास वोट हासिल करने में कामयाब रहती है तो पार्टी यहां तीसरी ताकत के रूप में स्थापित हो जाएगी। ‘आप’ कांग्रेस की चिंता बढ़ा सकती है। पिछले चुनाव में 29 सीटों पर लड़ने वाली पार्टी को महज 29 हजार वोट मिल पाए थे और सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। पार्टी को इन सीटों पर नोटा से भी कम वोट मिले थे। ऐसे में 5 साल के भीतर ही यह बड़ी छलांग होगी और अगले चुनाव के लिए पार्टी की उम्मीदों में इजाफा करेगी। पंजाब में पार्टी ने इसी तरह सफलता पाई है।
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