
नई दिल्ली: कभी पुतिन के सबसे भरोसेमंद रहे प्रिगोझिन ने अचानक मोर्चा नहीं खोला, बल्कि इसके पीछे एक सोची-समझी साजिश थी. हालांकि कहा तो यह भी जा रहा है कि रूस में जो कुछ हुआ (24 घंटे की जो बगावत चली) उसके पीछे अमेरिका का हाथ है. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है कि प्रिगोझिन ने जो कदम उठाया, उसके बाद उसको यूएस की तरफ से बड़ी राहत दी गई.
प्रिगोझिन की बगावत की टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं और सूत्रों से जो जानकारी मिली है, उसके हिसाब से साफ-साफ इसके पीछे यूएस का हैं. अमेरिका और प्रिगोझिन में सीक्रेट डील को लेकर एक बहुत ही बड़ा खुलासा हुआ है. इस खुलासे के बाद बगावत की इनसाइड स्टोरी बाहर आ गई है.
सीक्रेट डील के तीन बड़े सबूत
मिली जानकारी के अनुसार, वैगनर पर फिलहाल अमेरिका प्रतिबंध नहीं लगाएगा. अफ्रीकी देशों में गोल्ड माइनिंग को लेकर वैगनर पर प्रतिबंध लगने थे, जिसमें कहा गया था कि गोल्ड माइनिंग की कमाई से वह युद्ध में रूस की मदद कर रहा है. लेकिन बगावत एपिसोड के बीच यूएस ने प्रतिबंध टालने का फैसला किया है. बता दें कि अफ्रीकी देश लीबिया, माली और सूडान में वैगनर आर्मी तैनात है. यहां पर संसाधन और कूटनीतिक समर्थन के एवज में अफ्रीका की मदद वैगनर ग्रुप करता है.
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