
नई दिल्ली । सरकार (Government) से चालू सत्र 2024-25 के लिए 10 लाख टन चीनी निर्यात (10 lakh ton Sugar Export) की अनुमति मिलने के बाद भी भारतीयों व्यापारियों (Indians traders) को ऑर्डर पाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। चार डीलरों ने कहा, भारतीय चीनी मिलें (Indian sugar mills.) लंदन कीमतों से अधिक प्रीमियम मांग रही हैं, जिसे विदेशी खरीदार देने को तैयार नहीं हैं। भारत से चीनी निर्यात की गति भी घटकर तीन साल के निचले स्तर पर आ गई है।
मुंबई के एक डीलर ने बताया, केंद्र से निर्यात की अनुमति मिलने के बाद से चीनी की स्थानीय कीमतें करीब 10 फीसदी बढ़ गई हैं। मिलें अब अपने 3.174 फीसदी के आवंटित कोटे के निर्यात के लिए वैश्विक कीमतों पर भारी प्रीमियम मांग रही हैं। डीलरों ने बताया, चीनी मिलों ने इस सप्ताह 20,000 टन सफेद और रिफाइंड चीनी के निर्यात के लिए अनुबंध किया है। यह अनुबंध 490 से 510 डॉलर प्रति टन के बीच किया गया है, जो बेंचमार्क लंदन वायदा से करीब 10-25 डॉलर प्रति टन अधिक है।
दरअसल, चीनी मिलों को सितंबर, 2025 से पहले आवंटित कोटे का निर्यात करना है, इसलिए वे अनुबंध में जल्दबाजी नहीं दिखा रही हैं। इसके बजाय वे चीनी की वैश्विक कीमतें बढ़ने का इंतजार कर रही हैं। उत्तर प्रदेश ने आवंटित 2,74,184 टन के कोटे से करीब एक लाख टन चीनी निर्यात किया है।
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