
नई दिल्ली। दुनिया के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंजों (Stock Exchanges) में से एक वॉल स्ट्रीट (Wall Street) पर अस्थिर कारोबार (Volatile Business) करने के बाद शुक्रवार को एशियाई बाजारों (Asian Markets) में गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 68 देशों और यूरोपीय संघ पर अगले सात दिनों में लागू होने वाले नए टैरिफ का आकलन किया है।
जापान का निक्केई 225 0.4 प्रतिशत गिरकर 40,914.66 पर आ गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी 2.8 प्रतिशत गिरकर 3,154.53 पर आ गया। हांगकांग का हैंग सेंग सूचकांक शुरुआती गिरावट में 0.2 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,726.38 पर आ गया, जबकि शंघाई कम्पोजिट 0.1 प्रतिशत गिरकर 3,570.21 पर आ गया। ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी एएसएक्स 200 0.8 प्रतिशत गिरकर 8,676.80 पर, भारत का बीएसई सेंसेक्स 0.4 प्रतिशत गिरकर 81,185.58 पर और ताइवान का टीएआईईएक्स 0.4 प्रतिशत गिरकर 23,453.56 पर आ गया।
राबो बैंक के वरिष्ठ बाजार रणनीतिकार बेंजामिन पिक्टन ने कहा कि अमेरिका और यूरोपीय शेयर बाजार नकारात्मक संकेत दे रहे हैं, एशियाई शेयरों में गिरावट आ रही है और डीएक्सवाई सूचकांक अभी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका अपनी अर्थव्यवस्था के लिए उच्च मूल्य-वर्धित उद्योगों को चुन रहा है। वहीं अपने व्यापारिक साझेदारों पर दबाव बना रहा है कि वे उसके निर्यात के लिए विशेष बाजार पहुंच सुनिश्चित करें और सस्ते आयात की आपूर्ति करते रहें। यह साफ तौर पर साम्राज्यवादी व्यापार नीति है।
मिजुहो बैंक ने कहा कि स्थिति कुछ हद तक बदल गई है। एशिया खासतौर से दक्षिण-पूर्व एशिया, लिबरेशन डे के बाद अधिक प्रभावित हुआ था। अब टैरिफ अंतर के कारण बेहतर स्थिति में प्रतीत होता है, हालांकि क्षेत्रीय अंतर अभी भी कम है।
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