
नई दिल्ली। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) और राजस्थान (Rajasthan) में दूषित कफ सिरप (Contaminated Cough Syrup) पीने के बाद बच्चों की मौत का मामला सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) पहुंच गया है। शीर्ष अदालत में मंगलवार को एक जनहित याचिका (पीआईएल) में इन घटनाओं की अदालत की निगरानी में सीबीआई से जांच का अनुरोध किया गया है। अधिवक्ता विशाल तिवारी की ओर से दायर पीआईएल में बच्चों की मौत से संबंधित सभी लंबित प्राथमिकी और जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की गई है।
याचिका में किसी रिटायर न्यायाधीश की देखरेख में राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या विशेषज्ञ समिति के गठन का आग्रह भी किया गया है ताकि मामले में निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके। याचिका में दलील दी गई है कि अलग-अलग राज्यों की ओर से जांचें किए जाने के कारण जवाबदेही भी बंट गई है। इससे बार-बार चूक हो रही है और खतरनाक सिरप बाजार में पहुंच रहे हैं। अधिवक्ता ने पूरे देश में दूषित सिरप पर प्रतिबंध की मांग की है।
यही नहीं याचिका में केंद्र सरकार को राष्ट्रीय स्तर पर एक न्यायिक या विशेषज्ञ निकाय गठित करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है ताकि नियामक संबंधी कमियों की पहचान की जा सके। याचिका में यह भी कहा गया है कि भविष्य में किसी भी बिक्री या निर्यात की अनुमति देने से पहले सभी संदिग्ध उत्पादों का एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं के माध्यम से परीक्षण अनिवार्य किया जाए।
यह डेवलपमेंट ऐसे वक्त में सामने आया है जब दूषित कफ सिरप पीने के बाद मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है। पूरे मध्य प्रदेश की बात करें तो दूषित कफ सिरप पीने के बाद सूबे में मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है। इस बीच मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने सभी मेडिकल स्टोर्स की जांच के निर्देश जारी किए हैं। इस मुद्दे पर विपक्ष हमलावर है। विपक्ष सरकार पर लगातार हमले बोल रहा है।
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