इंदौर। इंदौर में साइबर अपराधों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल पर बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज हो रही हैं, जिनमें कई मामलों में लोगों के बैंक खाते ब्लॉक हो जाते हैं, सोशल मीडिया अकाउंट हैक कर लिए जाते हैं या ऑनलाइन ठगी के चलते उनकी मेहनत की कमाई गायब हो जाती है। ऐसे हालात में क्राइम ब्रांच की त्वरित कार्रवाई लोगों के लिए राहत बनकर सामने आई है।
एडिशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश दंडोतिया के अनुसार, वर्ष 2025 में जनवरी से नवंबर तक क्राइम ब्रांच ने साइबर फ्रॉड का शिकार हुए लोगों को 14 करोड़ 33 लाख 57 हजार 247 रुपए वापस दिलाए हैं। इस अवधि में विभाग को करीब 4,500 से अधिक साइबर फ्रॉड की शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से कई मामलों में प्रभावी कार्रवाई करते हुए पीड़ितों की राशि रिकवर कराई गई। सबसे ज्यादा रिकवरी जून माह में की गई। इस वर्ष क्राइम ब्रांच ने हजारों बैंक खातों को फ्रीज करवाया, जिनका उपयोग धोखाधड़ी में किया जा रहा था। इसके अलावा टीम ने 250 से ज्यादा हैक किए गए सोशल मीडिया अकाउंट सफलतापूर्वक रिस्टोर किए।
यही नहीं, ठगों द्वारा पीड़ितों की फोटो और नाम का इस्तेमाल करके बनाए गए 300 से ज्यादा फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट भी ब्लॉक कराए गए। अधिकारियों के अनुसार, यह अब तक की सबसे अधिक रिकवरी वाली सालाना अवधि में से एक है और टीम लगातार और भी प्रभावी कार्रवाई के लिए कार्य कर रही है। क्राइम ब्रांच ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी प्रकार की ऑनलाइन ठगी या वित्तीय धोखाधड़ी होने पर तुरंत स्थानीय पुलिस, क्राइम ब्रांच या नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर शिकायत दर्ज करें। समय पर की गई शिकायत से पैसे वापस मिलने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
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