
नई दिल्ली। तंबाकू उत्पादों (Tobacco Products) को लेकर जारी की गई केंद्र सरकार (Central Government) की अधिसूचना के मुताबिक सिगरेट (Cigarette) की लंबाई और फिल्टर के आधार पर प्रति एक हजार स्टिक पर 2050 रुपये से लेकर 8500 रुपये तक का टैक्स (Tax) लगेगा। वहीं, कच्चे तंबाकू पर 60–70 फीसदी का उत्पाद शुल्क लगेगा। उत्पाद शुल्क से प्राप्त धनराशि का वितरण वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार राज्यों के बीच साझा की जाएगी। कुल 41 प्रतिशत राजस्व राज्यों के बीच साझा किया जाता है।
पान मसाला उत्पादन इकाइयों की उत्पादन क्षमता के हिसाब से स्वास्थ्य उपकर लगाया जाएगा। उपकर से प्राप्त राजस्व का एक हिस्सा स्वास्थ्य जागरूकता या अन्य स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं एवं गतिविधियों पर खर्च के लिए राज्यों के साथ साझा किया जाएगा। जानकार मानते हैं कि सिगरेट, पान मसाला जैसे हानिकारक उत्पादों पर टैक्स की दर को बढ़ाने के पीछे मंशा उनकी खपत को कम करना है।
उच्च शुल्क सिगरेट को अधिक किफायती होने से रोकेंगे। वह भी ऐसे समय में जब तंबाकू से संबंधित बीमारियों का आर्थिक बोझ सालाना 24 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है।
स्वास्थ्य उपकर दो अहम मुद्दों पर होगा खर्च
बीते महीने संसद ने पान मसाला पर उपकर और तंबाकू पर उत्पाद शुल्क लगाने संबंधित विधेयक को मंजूरी दी थी। उस वक्त वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि स्वास्थ्य उपकर का उद्देश्य राष्ट्रीय महत्व के दो क्षेत्रों स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए समर्पित है। पान मसाला, सिगरेट, चबाने वाला तंबाकू, सिगार, हुक्का, जर्दा और सुगंधित तंबाकू समते सभी तंबाकू उत्पादों पर वर्तमान में 28 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाता था। साथ में अलग-अलग दरों के हिसाब से क्षतिपूर्ति उपकर लगाया जाता है, लेकिन अधिसूचना के बाद अब एक फरवरी से जीएसटी की दर बढ़कर 40 प्रतिशत हो जाएगी। साथ ही, उत्पाद शुल्क एवं क्षतिपूर्ति उपकर भी लागू होगा।
टैक्स चोरी रोकने में मदद मिलेगी
पान मसाला बनाने पर जीएसटी के साथ मशीन एवं क्षमता पर आधारित उपकर लगने से एक व्यापक कर ढांचा तैयार होगा, जिससे टैक्स चोरी की पहचान बेहतर होने के साथ राजस्व की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी। जीएसटी और उपकर के जरिये मूल्य और क्षमता से जुड़े दो अलग-अलग डेटा समूह उपलब्ध होंगे। आरएसपी पर आधारित जीएसटी से पता चलेगा कि कितने माल को किस कीमत पर बेचा गया, जबकि उपकर डेटा बताएगा कि मशीनों की क्षमता के आधार पर कितना उत्पादन संभव था। इन दोनों आंकड़ों का विश्लेषण सीसीटीवी फुटेज, औचक निरीक्षण, चार्टर्ड इंजीनियर द्वारा प्रमाणित मशीन मानकों और जोखिम-आधारित विश्लेषण के साथ करने पर कर वसूली में कमी की आशंका बहुत कम हो जाएगी।
स्वास्थ्य प्रभाव के अनुरूप कर बोझ होगा सुनिश्चित
सिगरेट पर वर्तमान में 28 प्रतिशत जीएसटी और अलग-अलग दरों पर क्षतिपूर्ति उपकर लगता है। जुलाई 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से पिछले सात वर्ष में सिगरेट पर टैक्स का स्तर स्थिर रहा है। वैश्विक स्तर पर 80 से अधिक देश हर साल तंबाकू करों में संशोधन करते हैं। जीएसटी लागू होने से पहले, भारत में भी सिगरेट पर उत्पाद शुल्क में वार्षिक वृद्धि की जाती थी। विश्व बैंक के अनुमानों के अनुसार, भारत में सिगरेट पर कुल टैक्स खुदरा मूल्य का करीब 53 प्रतिशत है जो तंबाकू की खपत में सार्थक कमी लाने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा अनुशंसित 75 प्रतिशत या उससे अधिक के मानक से काफी कम है।
सीसीटीवी, फुटेज को दो साल रखना अनिवार्य
तंबाकू, जर्दा सुगंधित तंबाकू और गुटखा बनाने वाली कंपनियों को एक फरवरी से सभी पैकिंग मशीनों पर सीसीटीवी प्रणाली लगानी होगी और उसकी फुटेज को कम-से-कम 24 महीने तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। अधिसूचना के मुताबिक, यदि कोई पैकिंग मशीन लगातार कम-से-कम 15 दिनों तक बंद रहती है, तो विनिर्माता उत्पाद शुल्क में छूट का दावा कर सकता है, लेकिन इसके लिए विभाग को तीन कार्यदिवस पहले सूचना देना और मशीन को सील कराना अनिवार्य होगा। उस मशीन को फिर से चालू करने या फैक्टरी से हटाने के लिए भी पूर्व सूचना देना आवश्यक होगा।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved