
इंदौर। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) की आर्थिक राजधानी इंदौर (Indore) में विकास कार्यों और ड्रेनेज सिस्टम (Drainage System) की बदहाली को लेकर राजनीति गरमा गई है। शहर के ड्रेनेज सिस्टम और अमृत-2 योजना में कथित अनियमितताओं के खिलाफ आज कांग्रेस (Congress) कार्यकर्ताओं ने नगर निगम (Municipal Corporation) के जोन कार्यालय पर एक अनोखा और उग्र प्रदर्शन किया। ‘अंधे प्रशासन’ को जगाने के लिए कांग्रेसी कार्यकर्ता आंखों पर सफेद पट्टी (White Bandage Over Eyes) बांधकर धरने पर बैठ गए।
ड्रेनेज और अमृत-2 योजना में भ्रष्टाचार का आरोप
प्रदर्शन का मुख्य केंद्र शहर की ड्रेनेज लाइन और अमृत-2 योजना के तहत होने वाले कार्यों में हो रही देरी और भ्रष्टाचार है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप है कि विकास के नाम पर करोड़ों रुपये का बंदरबांट किया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि ड्रेनेज लाइन का काम अधूरा पड़ा है। इससे स्थानीय निवासी नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।
“अंधा प्रशासन, गूंगी सरकार” के नारे
प्रदर्शनकारियों ने प्रतीकात्मक रूप से अपनी आंखों पर सफेद पट्टी बांधी, जिसका उद्देश्य यह संदेश देना था कि नगर निगम प्रशासन जनता की समस्याओं के प्रति पूरी तरह “अंधा” हो चुका है। प्रदर्शन के दौरान हर्ष डहेरिया और अन्य साथियों ने जमकर नारेबाजी की और प्रशासन के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया।
प्रदर्शन के प्रमुख बिंदु:
“वरना जोन कार्यालय पर लगा दूंगा ताला” – कांग्रेस नेता की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान माहौल तब और गरमा गया जब एक प्रमुख कांग्रेस नेता फोन पर किसी वरिष्ठ अधिकारी को सख्त लहजे में चेतावनी देते नजर आए। उन्होंने बेहद तल्ख लहजे में कहा, “किसी जिम्मेदार अधिकारी को हमारे पास भेजो, वरना जोन कार्यालय पर ताला लगा दूंगा।” कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं और जनता की सुनने वाला कोई नहीं है।
“सोनिया गांधी नगर में ड्रेनेज की स्थिति इतनी बदतर है कि गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है, लेकिन अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं हैं।” – एक प्रदर्शनकारी कार्यकर्ता
जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ का दावा
कांग्रेस का दावा है कि ड्रेनेज का पानी नर्मदा की लाइनों में मिल रहा है, जिससे भविष्य में महामारी जैसी स्थिति बन सकती है। प्रदर्शनकारियों का साफ़ तौर पर कहना है कि जब तक जिम्मेदार अधिकारी मौके पर आकर संतोषजनक जवाब नहीं देते और काम की समय-सीमा तय नहीं करते, उनका यह ‘गांधीवादी’ धरना जारी रहेगा।
इंदौर नगर निगम को स्वच्छता में नंबर-1 बनाए रखने की दावों के बीच इस तरह के प्रदर्शन प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। अब देखना यह है कि निगम प्रशासन इन गंभीर शिकायतों पर क्या ठोस कदम उठाता है।
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