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इंदौर के रेसीडेंसी क्षेत्र की सभी जमीन सरकारी घोषित, प्रथम प्रकाशन हुआ

January 02, 2026

  • दावे-आपत्ति के लिए 12 जनवरी तक का दिया समय
  • लीजधारकों ने आज तक नहीं भरी लीज की राशि

इंदौर। वर्षों से लंबित पड़ी रेसीडेंसी क्षेत्र की भूमि को लेकर नक्शा अभियान के तहत किए जा रहे सर्वे में पूरे क्षेत्र की जमीनों को सरकारी घोषित कर दिया गया है। नजूल मद में सरकारी दर्ज करने के बाद प्रशासन द्वारा प्रथम प्रकाशन जारी कर दिया गया है। अखबारों के माध्यम से सार्वजनिक सूचना प्रकाशित करने के साथ कलेक्टर कार्यालय व क्षेत्र में नोटिस चस्पा किया गया है। अब संबंधित भूमि पर दावे-आपत्ति प्रस्तुत करने के लिए 12 जनवरी तक सुनवाई की जाएगी। लंबे समय से सर्वेक्षण और दस्तावेजों की कमी के कारण उलझी प्रक्रिया एक बार फिर रफ्तार पकड़ चुकी है।

रेसीडेंसी क्षेत्र का समुचित सर्वेक्षण नहीं होने के कारण प्रशासन और निजी धारकों में विवाद की स्थितियां निर्मित हो रही थीं। रेसीडेंसी क्षेत्र की विभिन्न कॉलोनियों सहित धार कोठी, रतलाम कोठी, पिपलौदा व नारायण कोठी को लेकर भूमि स्वामी दर्ज करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था, लेकिन अब प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा चुकी है। प्रथम प्रकाशन कर पूरी जमीन को सरकारी दर्ज किया गया है। ज्ञात हो कि वर्ष 2024 में ड्रोन के माध्यम से क्षेत्र का सर्वेक्षण कर नक्शा तैयार किया गया, जिसके बाद उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण भी किया गया। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 में शासन ने इस क्षेत्र को नजूल भूमि घोषित कर दिया था। इसके बाद शासन के आदेश पर नगर निगम को उक्त भूमि से संबंधित सभी दस्तावेज तहसील कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।


  • महत्वपूर्ण दस्तावेजों की तलाश अभी जारी
    नगर निगम से कुछ दस्तावेज तहसील कार्यालय को प्राप्त हो चुके हैं, लेकिन अब भी कई महत्वपूर्ण अभिलेखों की तलाश जारी है। प्रशासन के अनुसार इन्हीं दस्तावेजों के अभाव में निर्णय प्रक्रिया में लगातार विलंब हो रहा था। पूर्व में इस क्षेत्र को तीन भागों में विभाजित कर सर्वेक्षण के आधार पर शिविर आयोजित किए गए थे, जिनमें रहवासियों से दस्तावेज एकत्र किए गए थे। उस दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने निवास, खरीदी-बिक्री और पट्टों से जुड़े कागजात प्रस्तुत किए थे। इस मामले में जनप्रतिनिधियों का भी विरोध सामने आया था। उनका कहना था कि क्षेत्र में लंबे समय से रह रहे लोगों के नाम मालिक के रूप में दर्ज किए जाएं। जनप्रतिनिधियों के दबाव और स्थिति की जटिलता को देखते हुए कलेक्टर ने शासन से मार्गदर्शन के लिए पत्राचार किया था। हालांकि शासन ने इस मामले में कोई स्पष्ट निर्णय न लेते हुए कलेक्टर को अपने विवेक से निर्णय लेने के निर्देश दिए। शासन से प्राप्त पत्र के बाद प्रशासन ने दोबारा सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया है।

    समाचार पत्रों में किया प्रकाशन
    पूर्व में तैयार किए गए नक्शे के आधार पर भूमि को अलग-अलग श्रेणियों में चिह्नांकित किया जा चुका है। इसी क्रम में अपर तहसीलदार जूनी इंदौर कमलेश कुशवाहा ने सार्वजनिक सूचना जारी की है। यह सूचना उनके कार्यालय, नगर निगम के संबंधित जोन कार्यालयों में प्रदर्शित की गई है और समाचार पत्रों के माध्यम से भी आमजन को अवगत कराया गया है। अपर तहसीलदार ने बताया कि रेसीडेंसी क्षेत्र की भूमि को लेकर 12 जनवरी तक दावे और आपत्तियां आमंत्रित की गई हैं। क्षेत्र में निवासरत सभी लोगों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने पास उपलब्ध सभी दस्तावेज—जिनके आधार पर वे लंबे समय से वहां निवास कर रहे हैं—निर्धारित समयसीमा में प्रस्तुत करें। इसके बाद सभी दावों और आपत्तियों का परीक्षण कर भूमि के संबंध में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    लीज की राशि ही नहीं भरी
    प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार जिला सर्वेक्षण अधिकारी और कलेक्टर द्वारा वर्ष 1959 से पूर्व के दस्तावेजों का विशेष परीक्षण किया जाएगा। उसी आधार पर आगे की कार्रवाई और निर्देश तय होंगे। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने इस भूमि को नक्शा अभियान में शामिल किया है, जिसके बाद यह पूरी प्रक्रिया फिर से सक्रिय होती नजर आ रही है। रेसीडेंसी क्षेत्र में कुछ भूमि पूर्व में लीज पर दी गई थी, जिनकी अवधि समाप्त हो चुकी है। लंबे समय से संबंधित पक्षों द्वारा भू-भाटक जमा नहीं किया गया, वहीं नगर निगम की ओर से भी लीज रेंट वसूली को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई थी। इसके अलावा यहां कई लोगों को पट्टे भी आवंटित किए जा चुके हैं। पूर्व में आयोजित शिविरों के दौरान कुछ मामलों में जमीन की खरीदी-बिक्री से जुड़ी रजिस्ट्रियां भी सामने आई थीं।

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