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ऑपरेशन वाले हाथों ने ‘राम राजा सरकार’ को मधुबनी शैली में पिरोया

January 02, 2026

  • चिकित्सा के साथ चित्रकला में भी निपुण हैं डॉ. रूपलेखा चौहान

सारिका राय, जबलपुर। संस्कारधानी में होने जा रही चौथी वल्र्ड रामायण कॉन्फ्रेंस के पूर्व भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित एक प्रदर्शनी का आयोजन मानस भवन में किया गया है। जिसमें देश-विदेश के बड़े-बड़े कलाकारों के चित्रों की प्रदर्शनीं लगाई गई। प्रदर्शनी में लाइफ पेंटिंग, पपेट आर्ट, आदिवासी जनजाति पेंटिंग से लेकर मधुबनी कला को श्रीराम के अनेक रूपों में दिखाया गया है। इसके अलावा जबलपुर के स्थानीय कलाकारों ने भी हिस्सा लिया। इन्ही में शामिल शहर की जानी-मानी चिकित्सक डॉ. रूपलेखा चौहान। जिन हाथों ने दशकों तक ऑपरेशन थिएटर में जीवन बचाने के लिए जटिल सर्जिकल उपकरणों को थामा, आज उन्हीं हाथों ने ब्रश और रंगों से ओरछा के ‘राम राजा सरकारÓ की पूरी गाथा को मधुबनी पेंटिंग के रूप में जीवंत कर दिया है। मेडिकल कॉलेज की पूर्व डीन व जबलपुर की प्रतिष्ठित स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. रूपलेखा चौहान सफल चिकित्सकीय जीवन के पश्चात पारम्परिक मधुबनी कला का विविध अध्ययन किया। रामचरित मानस पर आधारित उनकी चित्र श्रृंखला विभिन्न वर्ल्ड रामायण कॉन्फ्रेंस में प्रदर्शित एवं सराही गई। इन्हीं चित्रों पर आधारित उनकी पुस्तक के राम विराजे रंगो में प्रकाशित हो चुकी हैं। इस प्रस्तुति में मधुबनी शैली में विचित्र ओरछा के राम राजा सरकार की कथा प्रदर्शित की जा रही है जहां भक्ति और परंपरा का सुंदर समन्वय दृष्टिगोचर होता है।


राम विराजे रंगों में पुस्तक बनी पहचान
डॉ. रूपलेखा चौहान एक कलाकार और लेखिका हैं, जो रामायण पर आधारित मधुबनी चित्रकला की पुस्तक राम विराजे रंगों में के लिए जानी जाती हैं। प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित, उनकी कृति में आध्यात्मिक विषयों को पारंपरिक कला के साथ मिश्रित किया गया है, जो भगवान श्री राम के प्रति उनकी आजीवन भक्ति को दर्शाती है।

सरयू की लहरों से ओरछा के राजमहल तक का सफर

  • डॉ. रूपलेखा चौहान के अनुसार, पेंटिंग्स में 16वीं शताब्दी की उस ऐतिहासिक घटना को उकेरा है, जिसने ओरछा को ‘राम राजाÓ की नगरी बना दिया।
  • राजा-रानी का संवाद: ओरछा नरेश मधुकर शाह (कृष्ण भक्त) और रानी गणेश कुंवरी (राम भक्त) के बीच भक्ति को लेकर हुए संवाद ने इस यात्रा की नींव रखी।
  • कठोर तप और सरयू में छलांग: रानी ने अयोध्या जाकर सरयू किनारे कठोर तपस्या की। जब दर्शन नहीं हुए, तो सरयू में छलांग लगा दी, जहां उन्हें प्रभु राम का विग्रह प्राप्त हुआ।
  • शर्त और स्थापना: भगवान राम ने शर्त रखी थी कि वे जहां एक बार बैठ जाएंगे, वहां से नहीं उठेंगे और वे ही वहां के राजा कहलाएंगे। रानी ने चतुर्भुज मंदिर बनने तक मूर्ति अपने भोजन कक्ष (रसोई) में रख दी। शर्त के अनुसार, राम जी वहीं स्थापित हो गए और आज भी ओरछा में उन्हें राजा के रूप में ‘गार्ड ऑफ ऑनरÓ दिया जाता है।

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  • नर्मदा कलश स्थापना के साथ वल्र्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का श्रीगणेश

    Fri Jan 2 , 2026
    जबलपुर। संस्कारधानी में आयोजित चतुर्थ वल्र्ड रामायण कॉन्फ्रेंस का विधिवत श्रीगणेश नर्मदा कलश स्थापना के साथ अत्यंत भक्तिमय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का श्रीगणेश पूज्य ज्ञानेश्वरी दीदी, पंडित रोहित दुबे, आयोजन अध्यक्ष अजय विश्नोई, सचिव डॉ. अखिलेश गुमास्ता, पंकज गौर, रवि रंजन, शरद काबरा, रामजी अग्रवाल, प्रवेश खेड़ा, पवित्र मिश्रा, आलोक पाठक सहित बड़ी […]
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