
नई दिल्ली. सेना प्रमुख (Army Chief ) जनरल उपेंद्र द्विवेदी (Upendra Dwivedi) जल्द संयुक्त अरब अमीरात (UAI) और श्रीलंका (Sri Lanka) के दौरे पर रवाना होंगे। सूत्रों के अनुसार सेना प्रमुख का यह दौरा 4 से 9 जनवरी के बीच होने जा रहा है। सेना प्रमुख दोनों देशों में अपने समकक्षों एवं अन्य अधिकारियों से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने पर बातचीत करेंगे। सेना प्रमुख की यह यात्रा रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
सेना प्रमुख का श्रीलंका दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब चीन और पाकिस्तान श्रीलंका में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रहे। भारत का लक्ष्य स्वयं को प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता और स्थायी सुरक्षा मित्र के रूप में पेश करना रहा है। यात्रा का उद्देश्य भारत की नेबरहुड फर्स्ट नीति के तहत श्रीलंका को भरोसेमंद सुरक्षा साझेदार के तौर पर आश्वस्त करना है। इस दौरान दोनों देशों के बीच क्षमता निर्माण, संयुक्त प्रशिक्षण, व्यावसायिक आदान-प्रदान और संयुक्त अभ्यासों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। श्रीलंका के सैन्य नेतृत्व के साथ बातचीत से हिंद प्रशांत क्षेत्र में उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर साझा दृष्टिकोण विकसित करने में मदद भी मिलेगी।
दिसंबर में टाला गया था दौरा
गौरतलब है कि सेना प्रमुख की श्रीलंका यात्रा दिसंबर के पहले सप्ताह में होनी थी, लेकिन दित्वाह तूफान से मची तबाही के बीच श्रीलंका में राहत कार्यों की प्राथमिकता देखते हुए सेना प्रमुख के दौरे को टाल दिया गया था। दौरा स्थगित कर भारत ने श्रीलंका की मदद के लिए ऑपरेशन सागर बंधु शुरू किया था, जिसमें सेना के सभी अंगों ने अभूतपूर्व ताकत झोंकी थी।
अब निकोबार द्वीप पर भी तैनात होंगे लड़ाकू विमान, बढ़ेगी ताकत
उधर, सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने वायुसेना के उन्नत रनवे का उद्घाटन किया है। बता दें कि सामरिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में भारत ने अपनी सैन्य शक्ति को नई धार दी है। प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को कार निकोबार स्थित भारतीय वायुसेना की हवाई पट्टी पर उन्नत रनवे का उद्घाटन किया। यह कदम हिंद महासागर क्षेत्र, विशेषकर मलक्का जलडमरूमध्य पर भारत की निगरानी क्षमता को और मजबूत करेगा। अधिकारियों के अनुसार, रनवे के सुदृढ़ीकरण और एप्रन क्षेत्र के विस्तार से अब सुखोई-30 और मिराज जैसे लड़ाकू विमानों की आवाजाही अधिक सुगम होगी। यह रनवे वायुसेना को कम समय में लंबी दूरी के फायरिंग अभ्यास करने की क्षमता प्रदान करेगा।
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