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अमेरिका का वेनेजुएला पर एक्शन, दुनिया में टेंशन, लेकिन भारत को हो सकता है 9000 करोड़ का फायद

January 04, 2026

नई दिल्ली: अमेरिका ने एक बार फिर ऐसा काम किया है, जिससे दुनिया टेंशन में आ गई है. वेनेजुएला पर अटैक और फिर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (Nicolas Maduro Arrest) को एक सैन्य कार्रवाई के दौरान अमेरिकी सेना ने गिरफ्तार किया. उनका न्यूयॉर्क स्थित हिरासत केंद्र में ले जाने के दौरान का एक वीडियो वायरल हो रहा है. Venezuea Oil Sector पर अमेरिकी कंट्रोल और डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के बड़े दावों का असर क्रूड की कीमतों (Crude Oil Price) पर देखने को मिलेगा.

US के इस एक्शन से जहां रूस समेत कई देशों की टेंशन बढ़ी है, तो ये भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. रिपोर्ट के मुताबिक, वेनेजुएला के तेल पर अमेरिकी नियंत्रण से भारत के 1 अरब डॉलर के अटके हुए बकाया का भुगतान हो सकता है और प्रोडक्शन में भी वृद्धि देखने को मिल सकती है.

US का कंट्रोल, भारत के लिए गुड न्यूज
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, एनालिस्ट और उद्योग जगत के सूत्रों का मानना है कि अमेरिका के नेतृत्व में वेनेजुएला का तेल क्षेत्र आने, इसका अधिग्रहण या पुनर्गठन भारत को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने वाला साबित हो सकता है. इसमें कहा गया कि इससे संभावित रूप से लगभग 1 अरब अमेरिकी डॉलर (करीब 9000 करोड़ रुपये से ज्यादा) के लंबे समय से लंबित बकाया का भुगतान हो सकेगा. यही नहीं अमेरिका के कंट्रोल के बाद तमाम प्रतिबंधों से प्रभावित इस लैटिन अमेरिकी देश में भारत द्वारा संचालित सेक्टर्स में Crude Oil के उत्पादन में तेजी आ सकती है.


  • गौरतलब है कि वेनेजुएला पर एक्शन के बीच Donald Trump कह चुके हैं कि US Oil Firms वेनेजुएला में एंट्री लेंगी करेंगी और वहां खराब हो चुके ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार के लिए अरबों डॉलर का निवेश करेंगी. ट्रंप के मुताबिक, ‘हम तेल के कारोबार में हैं और हमें पता है कि कैसे तेल कंपनियां मुनाफे में आती हैं.’

    वेनेजुएला के तेल का बड़ा आयातक था भारत
    रिपोर्ट की मानें, तो कभी भारत Venezuela Crude Oil का बड़ा आयातक देश था. एक समय अपने हाई लेवल पर देश में प्रतिदिन 4 लाख बैरल से अधिक तेल यहां से आयात होता था. लेकिन साल 2020 से हालात बदल गए, जब अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों और अनुपालन जोखिमों के बढ़ते खतरे के चलते आयात पर बैन लग गया.

    ये भारतीय कंपनी प्रमुख तेल उत्पादक
    भारत की प्रमुख विदेशी उत्पादक कंपनी ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL), ईस्ट वेनेजुएला में सैन क्रिस्टोबल ऑयल सेक्टर में कंबाइंड रूप से संचालन करती है. US Bans के चलते 2020 के बाद से इसके कामकाज और तेल उत्पादन में भारी कमी आई है. इन सबके चलते देश में मौजूद भंडार बेकार पड़ा है और बकाया फंसा हुआ है.

    पीटीआई की मानें, तो इन सब परेशानियों के चलते वेनेजुएला की ओर से इस प्रोजेक्ट में OVL की 40% हिस्सेदारी पर 2014 तक देय 53.6 करोड़ डॉलर का डिविडेंड अटका पड़ा है. वहीं इसके बाद अब तक की अवधि में भी करीब-करीब इतनी ही रकम बकाया है. खास बात ये है कि ऑडिट परमिशन न मिलने की वजर से इन बकाया का निपटान नहीं हो सका.

    क्यों जागी भारत की उम्मीद?
    भारत का फंसा ये करीब 1 अरब डॉलर का बकाया पेमेंट मिलने की उम्मीद दरअसल, इसलिए जागी है क्योंकि वेनेजुएला ऑयल पर डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिका का कंट्रोल आने से ग्लोबल मार्केट में वहां से होने वाला तेल निर्यात बहाल होने की आस है. ऐसा होने पर ओएनजीसी विदेश लिमिटेड को अपना बकाया पाने में मदद मिल सकती है. इसमें कहा गया कि अमेरिका द्वारा लगाए गए बैन में ढील से Venezuelan Oil फिर से भारत आ सकता है.

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