तेहरान। ईरान में जारी अशांति (Ongoing unrest in Iran) के बीच गुरुवार को ईरानी हवाई क्षेत्र (Iranian airspace) को पांच घंटे तक बंद रहने के बाद फिर से खोल दिया गया है। एयरस्पेस अचानक बंद (Iranian airspace closed) करने का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया, लेकिन इसे अमेरिकी हमले से पहले सतर्कता के तौर पर देखा जा रहा है। हवाई क्षेत्र बंद होते ही दुनिया भर की एयरलाइंस को अपनी उड़ानों के रास्ते बदलने पड़े। हालांकि यह रोक सिर्फ कमर्शियल फ्लाइट्स पर लागू थी।
गौरतलब है कि देशव्यापी प्रदर्शनों पर सख्त कार्रवाई और अमेरिका की ओर से सैन्य हस्तक्षेप की चेतावनियों के बाद ईरान में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि अमेरिका जल्द ही सैन्य कार्रवाई कर सकता है। पिछले साल जून में भी ईरान ने इजरायल के साथ 12 दिन तक चले संघर्ष के दौरान अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था।
ईरान के हवाई क्षेत्र बंद होने से भारतीय एयरलाइंस भी प्रभावित हुईं। इंडिगो ने एक बयान जारी कर बताया कि कुछ अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ा है। वहीं एयर इंडिया ने बताया कि उसकी फ्लाइट्स वैकल्पिक रूट से उड़ान भर रही हैं, जिससे देरी या कुछ मामलों में रद्द होने की आशंका है। दोनों एयरलाइंस यूरोप और एशिया को जोड़ने वाले इसी अहम ईस्ट-वेस्ट रूट पर बड़ी संख्या में उड़ानें संचालित करती हैं। ऐसे में अगर ईरान ने दोबारा हवाई क्षेत्र बंद किया, तो उनके अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशंस पर बड़ा असर पड़ सकता है।
अन्य देशों और एयरलाइंस की चेतावनी
बुधवार को जर्मनी ने अपनी एयरलाइंस को ईरानी हवाई क्षेत्र से बचने की नई एडवाइजरी जारी की। इससे पहले लुफ्थांसा ने भी मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को देखते हुए अपनी उड़ानों में बदलाव किया था। अमेरिका पहले से ही अपनी सभी कमर्शियल उड़ानों को ईरान के ऊपर से उड़ने की इजाजत नहीं देता और दोनों देशों के बीच कोई सीधी उड़ान नहीं है। फ्लाईदुबई और तुर्कीश एयरलाइंस जैसी कंपनियों ने भी पिछले एक हफ्ते में ईरान के लिए कई उड़ानें रद्द की हैं।
ईरान का हवाई क्षेत्र क्यों है इतना जरूरी
ईरान का हवाई क्षेत्र अंतरमहाद्वीपीय उड़ानों के लिए बेहद अहम माना जाता है। यह यूरोप और एशिया को जोड़ने वाले प्रमुख ईस्ट-वेस्ट रूट पर स्थित है। यूरोप से दक्षिण एशिया, दक्षिण-पूर्व एशिया और पूर्वी एशिया जाने वाली उड़ानों के लिए यह सबसे सीधा और कम दूरी वाला रास्ता है। इस रूट का इस्तेमाल करने से एयरलाइंस को समय और ईंधन दोनों की बचत होती है। अगर ईरान के ऊपर से उड़ान की इजाजत नहीं मिलती है, तो विमानों को उत्तर या दक्षिण की ओर लंबा चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे उड़ान का समय कई घंटे बढ़ जाता है और लागत भी काफी ज्यादा हो जाती है।
एक पुरानी गलती
ईरान के हवाई क्षेत्र को लेकर चिंता की एक बड़ी वजह उसकी एक पुरानी गलती भी है। 2020 में ईरानी एयर डिफेंस ने यूक्रेन इंटरनेशनल एयरलाइंस की फ्लाइट PS752 को दुश्मन का विमान समझकर दो मिसाइलें दाग दी थीं। इस हादसे में विमान में सवार सभी 176 लोगों की मौत हो गई थी। ईरान ने कई दिनों तक विमान को गिराने के आरोपों को सिरे से खारिज किया, लेकिन अंत में इसे स्वीकार कर लिया।
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