वाशिंगटन। कई यूरोपीय देशों (European countries) ने एक साथ आकर डेनमार्क (Greenland) और ग्रीनलैंड का समर्थन किया है और उनके साथ एकजुटता जताई है। यह घटनाक्रम तब हुआ, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय संघ (EU) के आठ सदस्य देशों पर अगले महीने से दस फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी। ट्रंप का कहना है कि जब ग्रीनलैंड की खरीद पर समझौता नहीं हो जाता, तब तक यह टैरिफ इन देशों पर लागू रहेंगे।
बयान में क्या कहा गया है?
बयान में यह भी कहा गया कि टैरिफ की धमकियां ट्रांसअटलांटिक (अटलांटिक महासागर के आर-पार के देशों के) संबंधों को कमजोर करती हैं और खतरनाक स्थिति पैदा कर सकती हैं। इसमें कहा गया, नाटो के सदस्य होने के नाते हम आर्कटिक सुरक्षा को साझा ट्रांसअटलांटिक हित के रूप में मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। सहयोगियों के साथ पूर्व-निर्धारित डेनिश अभ्यास ‘आर्कटिक एंड्योरेंस’ इसी आवश्यकता का जवाब है। यह किसी के लिए खतरा नहीं है। हम डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों के साथ पूर्ण एकजुटता में खड़े हैं।
इसमें आगे कहा गया, हम पिछले सप्ताह शुरू हुई प्रक्रिया के आधार पर अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सिद्धांतों के अनुसार बातचीत के लिए तैयार हैं। टैरिफ की धमकियां ट्रांसअटलांटिक संबंधों को कमजोर करती हैं और खतरनाक स्थिति पैदा कर सकती हैं। हम अपने जवाब में एकजुट रहें और तालमेल बनाकर रखेंगे और हम अपनी संप्रभुता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
ट्रंप ने टैरिफ लगाने की धमकी क्यों दी?
शनिवार को ट्रंप ने ब्रिटेन और अन्य यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी, जब तक कि वे ग्रीनलैंड बेचने के लिए सहमत नहीं होते। अपने सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है और चीन और रूस की उस क्षेत्र में रुचि को इसका आधार बताया।
जर्मनी के चांसलर ने क्या कहा?
जर्मन चांसलर फ्रेडरिच मर्ज ने रविवार को कहा कि वह डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों के साथ पूरी तरह एकजुट हैं और मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि टैरिफ की धमकियां ट्रांसअटलांटिक संबंधों को कमजोर करती हैं और खतरनाक स्थिति पैदा कर सकती हैं। जर्मनी के चांसलर ने दोहराया कि टैरिफ की धमकियां ट्रांसअटलांटिक संबंधों को कमजोर करती हैं।
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