
डेस्क। तेलंगाना (Telangana) में कानून व्यवस्था (Law System) को सुलभ और नागरिकों के लिए आसान बनाने के लिए नया सिस्टम लाया जा रहा है। इसमें सीआईडी अपराधों (Crime) के पंजीकरण के लिए नागरिक केंद्रित सिस्टम शुरू किया जा रहा है। इसमें पोक्सो केस (Pocso Case) भी शामिल हैं। इसके तहत पीड़ितों को पुलिस स्टेशन जाने की ज़रूरत नहीं होगी। इसे अगले हफ्ते लॉन्च किया जाएगा।
सीआईजी की एडिशनल डीजीपी चारू सिन्हा ने बताया सिस्टम को इस तरह के तैयार किया गया है, जिसमें कुछ खास तरह के आपराधों में प्राथमिकी दर्ज करके पीड़ित का बयान उसके घर या पसंद का जगह पर दर्ज किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा इसे शुरू कर दिया गया है और अधिकारियों की ट्रेनिंग चल रही है। एक हफ्ते में ट्रेनिंग पूरी होने के बाद पहल 27 जनवरी से शुरू की जाएगी।
महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में, पोक्स एक्ट के तहत अपराध, एससा/ एसटी (अत्याचार निवारण) एक्ट के तहत अपराध, बाल विवाह निषेध एक्ट के तहत अपराध, और तेलंगाना रैगिंग निषेध एक्ट के तहत अपराधों में, पीड़ित और सूचना देने वाले अक्सर कमज़ोर, नाज़ुक, या दर्दनाक स्थिति में होते हैं। वे शिकायत दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन जाने के लिए शारीरिक या मानसिक रूप से तैयार नहीं हो पाते हैं।
इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए तेलंगाना पुलिस ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज करने के लिए स्टेशन-केंद्रित मॉडल से नागरिक-केंद्रित मॉडल ला रही है। इसमें पीड़ित को पुलिस के पास आने पर ज़ोर देने के बजाय जांच मशीनरी को पीड़ित के पास ले जाया जाएगा।
नई नागरिक-केंद्रित प्रक्रिया के तहत, बताई गई श्रेणियों में संज्ञेय अपराध होने के बारे में टेलीफोन या मौखिक जानकारी मिलने पर, संबंधित पुलिस तुरंत पीड़ित के घर, अपराध की जगह, अस्पताल, या पीड़ित की पसंद की किसी अन्य जगह पर जाएगी, और पीड़ित या घटना की जानकारी रखने वाले किसी अन्य व्यक्ति से शिकायत/रिपोर्ट लेगी।
इस तरह मिली शिकायत की प्राथमिकी दर्ज करने के लिए अधिकारी को संबंधित पुलिस स्टेशन भेजा जाएगा। प्राथमिकी की कॉपी पीड़ित या सूचना देने वाले को उनके घर या पसंद की जगह पर दी जाएगी, न कि उन्हें पुलिस स्टेशन आने के लिए कहा जाएगा। जहां ज़रूरी होगा, पुलिस भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 180 और 183 के तहत बयान भी उसी जगह पर रिकॉर्ड करेगी।
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