
नई दिल्ली। ट्रंप ने कहा कि जुलाई 2025(Trump said July 2025) में दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग(South Korean President Lee Jae-myung) के साथ हुए समझौते में(In the agreement) अमेरिका ने टैरिफ घटाकर(The US reduced tariffs) 15% किया था, लेकिन दक्षिण कोरिया की संसद ने इसे अभी तक कानून नहीं बनाया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप(US President Donald Trump) ने सोमवार को घोषणा करते हुए कहा कि वह दक्षिण कोरियाई(South Korean) सामानों पर आयात शुल्क (टैरिफ) बढ़ा रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि दक्षिण कोरिया(South Korea) की संसद (नेशनल असेंबली)(Parliament) (National Assembly)) ने अभी तक उस ‘व्यापार ढांचे'(‘Business Framework’) को मंजूरी नहीं दी है, जिसकी घोषणा पिछले साल की गई थी। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस फैसले की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि किन क्षेत्रों पर इसका असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया से आने वाली कारों (ऑटोमोबाइल), लकड़ी (लंबर) और दवाओं (फार्मास्युटिकल ड्रग्स) पर टैरिफ बढ़ाया जाएगा। अन्य सामानों पर भी टैरिफ की दर 15% से बढ़ाकर 25% कर दी जाएगी। बता दें कि दक्षिण कोरिया उन देशों में आता है जिनका अमेरिका के साथ घनिष्ठ आर्थिक संबंध है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने(The American president) इन टैरिफ को लागू करने के लिए ‘आर्थिक आपातकाल’ घोषित करके अमेरिकी संसद (कांग्रेस) को दरकिनार कर दिया है। दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया में जुलाई में घोषित और अक्टूबर में ट्रंप की यात्रा के दौरान पुष्टि किए गए इस ढांचे के लिए वहां की संसद से विधायी मंजूरी लेना आवश्यक था, जो अभी तक नहीं मिली है। इस बात से भड़के ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा- अमेरिका के लिए हमारे व्यापार समझौते बहुत महत्वपूर्ण हैं। इनमें से प्रत्येक समझौते में, हमने सहमति के अनुरूप अपने टैरिफ को कम करने के लिए तेजी से काम किया है। हम निश्चित रूप से अपने व्यापारिक भागीदारों से भी यही उम्मीद करते हैं। लेकिन दक्षिण कोरिया ने ऐसा नहीं किया। इसलिए अब टैरिफ बढ़ा रहे हैं।
दक्षिण कोरिया की प्रतिक्रिया
दक्षिण कोरिया(South Korea) के राष्ट्रपति कार्यालय ने एक बयान जारी कर कहा कि अमेरिका ने उन्हें टैरिफ वृद्धि की योजना के बारे में आधिकारिक तौर पर सूचित नहीं किया है। स्थिति को संभालने के लिए दक्षिण कोरिया(South Korea) ने कई कदम उठाए हैं। दक्षिण कोरिया के उद्योग मंत्री किम जंग-क्वान इस समय कनाडा के दौरे पर हैं। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही अमेरिका जाएंगे। वहां वह अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लटनिक के साथ बातचीत करेंगे। राष्ट्रपति के नीति प्रमुख (चीफ ऑफ स्टाफ फॉर पॉलिसी) किम योंग-बीओम, ट्रंप की घोषणा पर चर्चा करने के लिए एक बैठक बुलाएंगे।
रिश्तों में तनाव और पिछला संदर्भ
यह कदम ट्रंप प्रशासन और दक्षिण कोरिया के बीच उतार-चढ़ाव भरे संबंधों को दर्शाता है। ट्रंप ने अतीत में अपने टैरिफ को दक्षिण कोरिया द्वारा अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 350 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता से जोड़ा था, जिसमें अमेरिकी शिपयार्ड (जहाज निर्माण) को पुनर्जीवित करना शामिल था। दोनों देशों के संबंध तब तनावपूर्ण हो गए थे जब पिछले साल जॉर्जिया में ‘हुंडई’ की मैन्युफैक्चरिंग साइट पर आव्रजन अधिकारियों ने छापा मारा था, जिसके कारण 475 लोगों को हिरासत में लिया गया था।
ट्रंप की वैश्विक ‘टैरिफ कूटनीति’
सोमवार की यह घोषणा एक बड़े पैटर्न का हिस्सा है जहां ट्रंप अन्य देशों को अपनी शर्तों पर झुकाने के लिए टैरिफ का उपयोग करते हैं। पिछले हफ्ते, ट्रंप ने 8 यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, हालांकि बाद में दावोस में बैठक के बाद वे पीछे हट गए। यूरोपीय संसद ने भी अभी तक ट्रंप द्वारा समर्थित उस व्यापार सौदे को मंजूरी नहीं दी है जिसमें ईयू के निर्यात पर 15% कर लगाने की बात थी। शनिवार को ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि कनाडा चीन के साथ व्यापार बढ़ाता है, तो वह कनाडाई सामानों पर 100% टैक्स लगाएंगे।
वैश्विक अर्थव्यवस्था(Global economy) और अमेरिकी मतदाताओं को इस साल लगातार व्यापारिक व्यवधानों का सामना करना पड़ सकता है। अमेरिका इस साल कनाडा और मैक्सिको के साथ अपने 2020 के संशोधित व्यापार समझौते पर फिर से बातचीत करने के लिए तैयार है। 1962 के व्यापार विस्तार अधिनियम के तहत जांच चल रही है। इसके अलावा, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट जल्द ही यह फैसला करने वाला है कि क्या ट्रंप ने 1977 के ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ के तहत टैरिफ घोषित करके अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है या नहीं।
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