
नई दिल्ली । अपने गृह निर्वाचन क्षेत्रों (Home constituencies) से बाहर उच्च शिक्षा (Higher education) प्राप्त कर रहे छात्रों के मताधिकार (vote) को लेकर मंगलवार को उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) में एक जनहित याचिका दायर की गई। याचिका में इस बात पर जोर दिया गया है कि आजादी के लगभग 77 साल बाद भी पात्र छात्र मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग प्रभावी रूप से चुनावी प्रक्रिया से बाहर है। कर्मचारियों के विपरीत छात्रों के पास ऐसा कोई संस्थागत तंत्र नहीं है, जो उन्हें मत देने के लिए अपने निर्वाचन क्षेत्रों में वापस जाने में सक्षम बनाए। शैक्षणिक कार्यक्रम, परीक्षाएं, यात्रा की लागत और अन्य व्यावहारिक बाधाएं उनकी चुनाव में भागीदारी को और अधिक सीमित कर देती हैं।
याचिका में यह भी बताया गया है कि छात्रों को पोस्टल बैलेट या किसी वैकल्पिक मतदान तंत्र के माध्यम से मत देने की अनुमति नहीं है। इसके परिणामस्वरूप अपने पैतृक स्थानों से दूर विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पढ़ने वाले युवा मतदाताओं से बड़े पैमाने पर मताधिकार छिन जाता है।
दरअसल, यह मुद्दा तमिलनाडु नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के 2024 बैच के छात्र जयसुधागर जे. द्वारा एक चुनाव कानून शोध परियोजना के आधार पर शीर्ष अदालत के समक्ष लाया गया है। इस शोध में मतदाता आबादी के भीतर छात्रों को शामिल करने के संबंध में मौजूदा चुनावी ढांचे में एक संवैधानिक कमी की पहचान की गई थी और छात्र समुदाय के प्रभावी मतदान अधिकारों के हनन की जांच की गई थी।
शोध के निष्कर्षों के आधार पर, यह जनहित याचिका संवैधानिक राहत और उचित निर्देशों की मांग करती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि छात्रों को केवल उनके अध्ययन के स्थान के कारण उनके मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न किया जाए। उच्चतम न्यायालय में इस मामले की सुनवाई 28 जनवरी के लिए सूचीबद्ध है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved