
वॉशिंगटन. अमेरिका (US) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने मंगलवार को कहा कि ‘क्यूबा (Cuba) बहुत जल्दी असफल होने वाला है।’ उन्होंने यह बयान इसलिए दिया क्योंकि वेनेजुएला (Venezuela)- जो क्यूबा को तेल (oil) और धन (money) देता था- अब मदद नहीं कर रहा है। जनवरी की शुरुआत में अमेरिका ने वेनेजुएला में एक सैन्य अभियान चलाया और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को एक ऑपरेशन में पकड़ लिया। ट्रंप का कहना है कि इसके बाद वेनेजुएला अब क्यूबा को तेल और पैसा नहीं भेज रहा है- और यही क्यूबा की अर्थव्यवस्था का बड़ा सहारा था। उन्होंने कहा कि क्यूबा ‘असल में एक ऐसा देश है जो लगभग फेल होने वाला है।’
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और आलोचना
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने कहा कि वेनेजुएला में मादुरो की गिरफ्तारी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन थी। मानवाधिकार विशेषज्ञों ने ट्रंप की प्रतिक्रिया को साम्राज्यवाद जैसा बताया और कहा कि अमेरिका मुख्य रूप से तेल और सत्ता को नियंत्रित करने पर ध्यान दे रहा है। जब ट्रंप ने सुझाव दिया था कि कम्युनिस्ट शासित द्वीप को अमेरिका के साथ एक समझौता करना चाहिए, इस पर क्यूबा के राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका के पास क्यूबा के साथ कोई नैतिक अधिकार नहीं है कि वह उसे किसी समझौते के लिए मजबूर करे।
क्या हैं क्यूबा की मुश्किलें?
क्यूबा पहले से अर्थव्यवस्था संकट में है, बिजली कटौती और तेल की कमी जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। मेक्सिको ने हाल ही में तेल सप्लाई रद्द कर दिया, जिससे क्यूबा की मुश्किलें और बढ़ीं। पर्यटन भी घट गया है, जिससे राजस्व में भारी गिरावट हुई है। अपने गहरे होते ऊर्जा और आर्थिक संकट में, क्यूबा मैक्सिको, रूस और – पहले – वेनेजुएला जैसे सहयोगियों से मिलने वाली विदेशी सहायता और तेल शिपमेंट पर काफी हद तक निर्भर रहा है।
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