वाशिंगटन। दूसरे विश्व युद्ध (Second world war) के बाद से वैश्विक नेतृत्व (Global leadership) की भूमिका निभा रहे अमेरिका के लिए अब चुनौतियाँ बढ़ती नजर आ रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में वैश्विक वास्तविक जीडीपी वृद्धि में योगदान के मामले में भारत और चीन, अमेरिका से आगे निकलते दिखाई दे रहे हैं।
आईएमएफ के अनुमान बताते हैं कि वर्ष 2026 में चीन वैश्विक जीडीपी वृद्धि में 26.6 प्रतिशत और भारत 17.0 प्रतिशत का योगदान देगा। यानी दोनों देश मिलकर दुनिया की कुल वास्तविक जीडीपी वृद्धि का लगभग 44 प्रतिशत हिस्सा संभालेंगे। इस सूची में अमेरिका तीसरे स्थान पर है, जिसका योगदान 9.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
क्या कहती है IMF की रिपोर्ट
आईएमएफ हर साल वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर अनुमान आधारित आंकड़े जारी करता है। 2026 के लिए वैश्विक जीडीपी वृद्धि दर 3.3 प्रतिशत और 2027 के लिए 3.2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक वैश्विक महंगाई में गिरावट की संभावना है, हालांकि अमेरिका में यह प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी रह सकती है। साथ ही आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि वैश्विक आर्थिक परिदृश्य से जुड़े जोखिम अभी भी नकारात्मक दिशा में झुके हुए हैं।
अमेरिका की नीतियों पर उठे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियाँ लंबे समय में अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती हैं। इन नीतियों के चलते कनाडा समेत कई नाटो देश भी अब अमेरिका के विकल्प तलाशते नजर आ रहे हैं। हालांकि, इसके बावजूद अमेरिका फिलहाल एक बड़ी वैश्विक आर्थिक शक्ति बना हुआ है और निकट भविष्य में उसकी भूमिका पूरी तरह कमजोर होने की संभावना नहीं है।
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