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अब नहीं होगी जेल, बजट में बदल दिए गए ये नियम, केवल जुर्माना देकर रफा-दफा होगा मामला

February 01, 2026

नई दिल्ली: मिडिल क्लास (Middle Class) को सबसे ज्यादा आयकर में छूट की उम्मीद थी. ऐसा नहीं हुआ. लेकिन आयकर से जुड़े कई नियमों में बदलाव किए गए हैं. खासकर टैक्स (Tax) भरने की प्रक्रिया को आसान करना, मुकदमेबाजी कम करना, और बेवजह जुर्माना और जेल की सजा से बचाना है. खासकर ऐसे मामलों में जहां गलती जानबूझकर नहीं, बल्कि नियमों की जटिलता, तकनीकी चूक या जानकारी की कमी के कारण हुई हो.

दरअसल, बजट भाषण के दौरान वित्त मंत्री ने कहा कि नया इनकम टैक्स एक्ट-2025 इसी साल 1 अप्रैल 2026 से लागू हो जाएगा. वित्त मंत्री ने बजट में बताया कि NRI के लिए अपनी प्रॉपर्टी बेचना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है. पहले एनआरआई को प्रॉपर्टी बेचते समय TDS काटने और जमा करने के लिए एक खास नंबर TAN (Temporary Accounting Number) लेना पड़ता था. इससे लोगों को परेशानी होती थी.

लेकिन अब बजट में इसे बेहद सरल बना दिया गया है. अब प्रॉपर्टी खरीदने वाले भारतीय खरीदार ही TDS काटेंगे और उसे अपने PAN वाले चालान के जरिए जमा कर देंगे. इससे एनआरआई को TAN लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी.


  • NRI के लिए राह आसान
    विदेशी कमाई या संपत्ति खुलासा नहीं किया है. इसके अलावा जिन NRI ने विदेशी आय का खुलासा तो किया है और उसका टैक्स भी दिया. लेकिन जितनी संपत्ति का खुलासा करना था, उतना नहीं कर पाए. अब ऐसे लोगों को राहत दी जाएगी. केवल जुर्माना भरकर वो मामले का निपटारा कर सकते हैं. यानी विदेशों में छोटे-मोटे एसेट्स का खुलासा न करने वालों को बड़ी छूट मिली है, इस तरह की आय छिपाने वालों को जेल नहीं होगी.

    दरअसल, कई बार लोग विदेश में छोटी-मोटी संपत्ति रखते हैं, लेकिन टैक्स रिटर्न में उसका खुलासा नहीं करते हैं. ऐसे लोगों को बजट में राहत दी गई है. अब जिनकी विदेश में रखी गई गैर-अचल संपत्ति की कुल कीमत 20 लाख रुपये से कम है. अगर उन्होंने इसका खुलासा नहीं भी किया है, तो भी उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी. यानी उन्हें दंडित नहीं किया जाएगा. जिन्होंने विदेशी आय तो बताई है, लेकिन संपत्ति घोषित नहीं कर पाए. 20 लाख रुपये से कम मूल्य की विदेशी अचल संपत्ति को घोषित न करने पर अब 1 अक्टूबर 2024 से कोई दंड या अभियोजन नहीं होगा.

    अब NRI के सामने दो विकल्प
    वैसे NRI जिन्होंने अपनी विदेशी आय या संपत्ति की जानकारी नहीं दी है. ऐसे करदाताओं के लिए यह सीमा 1 करोड़ रुपये तक रखी गई है, उन्हें अपनी छुपी हुई आय या संपत्ति के मूल्य का 30 फीसद टैक्स देना होगा और इसके अलावा 30 फीसदी अतिरिक्त टैक्स देना पड़ेगा. इतना भुगतान करने पर उन्हें कोई जुर्माना या कानूनी कार्रवाई नहीं झेलनी होगी.

    वहीं जिन्होंने विदेशी आय तो बताई है, लेकिन संपत्ति घोषित नहीं कर पाए. उनके लिए संपत्ति की सीमा 5 करोड़ रुपये तक होगी. ऐसे मामलों में सिर्फ 1 लाख रुपये का शुल्क देने पर जुर्माना और अभियोजन दोनों से पूरी राहत मिल जाएगी.

    तकनीकी गलतियों पर राहत
    इसके अलावा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट डायरेक्ट टैक्स व्यवस्था में दंड और अभियोजन को सरल के साथ-साथ तर्कसंगत बनाने के प्रस्ताव किए हैं. टैक्स निर्धारण और दंड से जुड़ी कार्यवाहियों को अब एक ही सामान्य आदेश के जरिए निपटाया जाएगा, जिससे दोहराव कम होगा. अपील की अवधि के दौरान दंड राशि पर कोई ब्याज नहीं लगेगा.

    अपील के लिए पहले जमा की जाने वाली राशि 20 फीसदी से घटाकर 10 प्रतिशत कर दी गई है. मुकदमेबाजी कम करने के लिए करदाता को पुनर्मूल्यांकन के बाद भी रिटर्न अपडेट करने की अनुमति होगी, जिसमें लागू कर के साथ अतिरिक्त 10 प्रतिशत टैक्स देना होगा. गलत जानकारी देने के मामलों में टैक्स, ब्याज के साथ 100 फीसदी अतिरिक्त टैक्स जमा करने पर ऐसे मामलों में सजा या कानूनी कार्रवाई से राहत मिलेगी.

    खातों की ऑडिट न कराना, ट्रांसफर प्राइसिंग रिपोर्ट न देना या वित्तीय जानकारी देने में चूक जैसी तकनीकी गलतियों पर अब दंड की जगह मामूली शुल्क लिया जाएगा. लेखा बही या दस्तावेज न देना, या वस्तु के रूप में भुगतान पर टीडीएस न काटना अब अपराध नहीं माना जाएगा.

    इनकम टैक्स कानून को अपराध की कैटेगरी बाहर निकालने की कवायद
    सरकार ने इनकम टैक्स कानून को अपराध की कैटेगरी से बाहर निकालने (Decriminalization) की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. नए नियम के मुताबिक अगर किसी टैक्सपेयर की इनकम में गड़बड़ी पाई जाती है या टैक्स छिपाया गया है तो उसे अब जेल की सजा नहीं होगी. सिर्फ जुर्माना देकर मामला को रफा-दफा किया जा सकता है. यह नया बदलाव 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले ‘नए इनकम टैक्स एक्ट’ का हिस्सा होगा.

    छोटे मामलों में केवल जुर्माना लगेगा और गंभीर मामलों में भी अधिकतम सजा घटाकर 2 साल की दी गई है, जिसे अदालत जुर्माने में बदल सकती है. पहले आयकर कानून में गंभीर मामलों में अधिकतम सजा 7 साल तक की हो सकती थी. कुछ मामलों में 3 साल की सीमा थी. नए नियम के मुताबिक आईटीआर-1 और आईटीआर-2 दाखिल करने वालों के लिए अंतिम तारीख 31 जुलाई ही रहेगी. गैर-ऑडिट व्यापार मामलों और ट्रस्टों को रिटर्न दाखिल करने के लिए 31 अगस्त तक का समय मिलेगा.

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