
नई दिल्ली । बॉलीवुड के फैंस आज भी सलमान खान की फिल्म ‘तेरे नाम’ को 2000 के शुरुआती दौर की सबसे यादगार रोमांटिक फिल्मों में से एक मानते हैं. फिल्म में सलमान खान और भूमिका चावला की एक्टिंग ने दर्शकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी थी. इसके गाने, भावनात्मक दृश्यों और दर्दभरे अंत ने फिल्म को लंबे समय तक लोगों की यादों में बनाए रखा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि फिल्म के सबसे दर्दनाक और प्रभावशाली सीन, जो मानसिक अस्पताल श्रीपुरधाम आश्रम में दिखाए गए थे, असली पागलखाने में शूट नहीं हुए थे
असल में, फिल्ममेकरों ने राधे के मानसिक और भावनात्मक संघर्ष को दर्शाने के लिए गोलकोंडा किले का चयन किया था. किले की अंधेरी गलियां, लोहे के गेट और पत्थर की दीवारें इस सीन को असली मानसिक अस्पताल जैसा माहौल देती हैं. किले के शांत और खाली हिस्सों ने फिल्म के सेट को पूरी तरह जीवंत और यथार्थ दिखाने में मदद की. इस तरह से राधे के किरदार के दर्द और जज्बातों को पर्दे पर और अधिक प्रभावशाली तरीके से पेश किया जा सका
‘तेरे नाम’ 2003 में रिलीज हुई थी और सतीश कौशिक के निर्देशन में बनी यह फिल्म सलमान खान के करियर के लिए भी एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई. फिल्म में राधे के किरदार में सलमान खान की एक्टिंग को आज भी समीक्षकों और दर्शकों द्वारा याद किया जाता है. उनकी भावपूर्ण प्रस्तुति ने दर्शकों को राधे के दर्द और संघर्ष से जोड़ा और फिल्म को एक क्लासिक बना दिया
गोलकोंडा किला, जो हैदराबाद की सबसे मशहूर ऐतिहासिक जगहों में से एक है, वर्षों से फिल्मों की शूटिंग का पसंदीदा स्थल रहा है. इसके प्राचीन हिस्सों, विशाल किलेबंदी और ऐतिहासिक वातावरण ने इस तरह की फिल्मों के लिए आदर्श सेट प्रदान किया है. ‘तेरे नाम’ के निर्देशक और फिल्म टीम ने किले के हर कोने का उपयोग कर सीन को यथासंभव वास्तविक और भावपूर्ण बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी
अगली बार जब आप ‘तेरे नाम’ देखें, तो श्रीपुरधाम आश्रम के सीन पर ध्यान दीजिए. शायद आपको राधे के दर्द और मानसिक संघर्ष के बीच गोलकोंडा किले की पुरानी दीवारों और गेट की झलक साफ दिखाई दे. यही फिल्म निर्माण की खूबसूरती है कि कैसे एक ऐतिहासिक किले ने एक भावपूर्ण कहानी को जीवंत बनाया और दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी
‘तेरे नाम’ का यह सीन आज भी लोगों की यादों में ताजा है और फिल्म की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण है. दर्शकों को यह जानकर आश्चर्य होगा कि असली मानसिक अस्पताल के बजाय गोलकोंडा किले ने राधे के दर्द और जज्बातों को पर्दे पर जीवन दिया
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