
मुंबई। फिल्मी दुनिया की चकाचौंध के पीछे अक्सर अंधेरी गलियों का लंबा सफर होता है, और रवि किशन(Ravi Kishan) इसके सबसे बड़े उदाहरण हैं। आज भले ही हर कोई ‘मामला लीगल है’ के वीडी त्यागी या ‘लापता लेडीज(Missing Ladies) के इंस्पेक्टर मनोहर(Inspector Manohar) के गुणगान कर रहा हो, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने के लिए रवि किशन ने पूरे 34 साल तक इंतजार(Waited for 34 years) किया है। हाल ही में एक साक्षात्कार में उन्होंने अपने दिल का हाल बयां करते हुए बताया कि एक दौर ऐसा भी था जब उन्हें लगने लगा था कि अब सब कुछ खत्म हो गया है और वे फिल्म इंडस्ट्री(Film Industry) की इस भीड़ भरी रेस से बाहर हो चुके हैं।
रवि किशन के करियर में सलमान खान की फिल्म ‘तेरे नाम’ (2003) एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती थी, लेकिन हकीकत इसके उलट रही। रवि बताते हैं कि उस फिल्म के बाद उन्हें हिंदी सिनेमा में काम मिलना लगभग बंद हो गया था। वे काफी थक चुके थे और निराशा उन पर हावी होने लगी थी। उन्हें महसूस हुआ कि बॉलीवुड में इतनी भीड़ है कि वहां उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है। हालांकि, उन्होंने इस नाकामी का दोष कभी इंडस्ट्री को नहीं दिया, बल्कि अपने उस गुस्से और ऊर्जा को भोजपुरी सिनेमा की ओर मोड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि वे भोजपुरी फिल्मों के बेताज बादशाह बन गए, लेकिन हिंदी सिनेमा की मुख्यधारा से उनकी दूरी बनी रही।
बीते कुछ सालों में रवि किशन के करियर ने जो करवट ली है, उसने हर किसी को हैरान कर दिया है। रवि किशन कहते हैं, “जब लोगों को लगने लगा कि मैं सिर्फ राजनीति में रह गया हूं या अब मेरी उम्र हो गई है और मैं धीरे-धीरे गायब हो जाऊंगा, तभी ईश्वर की कृपा हुई।” किरण राव की फिल्म ‘लापता लेडीज’ ने उनके अभिनय को एक नई पहचान दी। इसके बाद ‘मामला लीगल है’ जैसी सीरीज ने साबित कर दिया कि एक मंझे हुए कलाकार को यदि सही कंटेंट मिले, तो वह क्या कमाल कर सकता है। रवि मानते हैं कि उनकी यह जर्नी उन सभी संघर्ष करने वाले कलाकारों के लिए एक मिसाल है, जो बीच रास्ते में हार मान लेते हैं।
वर्तमान में वे फिल्म ‘भाबीजी घर पर हैं: फन ऑन द रन’ को लेकर चर्चा में हैं। इस फिल्म में वे एक ऐसे प्रेमी का किरदार निभा रहे हैं जिसका प्यार एकतरफा है। रवि किशन का कहना है कि वे असल जिंदगी में यूपी-बिहार के ऐसे कई लोगों से मिलते हैं, इसलिए इस किरदार को निभाना उनके लिए काफी सहज रहा। 34 साल के इस लंबे इंतजार के बाद मिली सफलता पर रवि किशन अब बेहद विनम्र हैं। वे कहते हैं कि यह सब ‘उगते सूरज’ का खेल है। जो प्यार उन्हें आज दर्शकों और फिल्म मेकर्स से मिल रहा है, वह उनके सालों के धैर्य और मेहनत का मीठा फल है। रवि किशन की यह कहानी सिखाती है कि अभिनय की पिच पर टिके रहना ही सबसे बड़ी जीत है।
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