
नई दिल्ली । दुश्मनों पर हवाई हमले के मोर्चे में भारत (India) और भी ज्यादा ताकतवर होने जा रहा है। खबर है कि DRDO यानी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने मंगलवार को रैमजेट (SDFR) का सफर परीक्षण कर लिया है। खास बात है कि इसकी मदद से भारत की लंबी दूरी की मिसाइलें (Missile) और भी सटीक निशाना लगा सकेंगी। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि यह परीक्षण ओडिशा अपतटीय क्षेत्र स्थित चांदीपुर के एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) में किया गया।
क्या है रैमजेट
रैमजेट एक तरह का एयर-ब्रीदिंग जेट इंजन है, जो आने वाली हवा को दबाने (कंप्रेस करने) के लिए मिसाइल की आगे की गति का इस्तेमाल करता है। इस तकनीक की मदद से मिसाइल को जेट इंजनों की तरह घूमने वाले पार्ट्स पर निर्भर नहीं रहना होगा। सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट में फ्यूल को नियंत्रित तरीके से जलाया जाता है, जबकि बाहर की हवा इंजन के अंदर से गुजरती रहती है। इससे मिसाइल को तेज गति पर लंबे समय तक लगातार ताकत मिलती रहती है।
रैमजेट से चलने वाली मिसाइलें ज्यादा देर तक बहुत तेज रफ्तार बनाए रख सकती हैं। खासकर मिसाइल की उड़ान के आखिरी चरण में तकनीक और फायदेमंद हो जाती है। इसी वजह से ये मिसाइलें ज्यादा तेज, ज्यादा फुर्तीली होती हैं और दुश्मन के विमानों के लिए इन्हें बचकर निकलना काफी मुश्किल हो जाता है। जबकि, पारंपरिक रॉकेट मोटर्स जल्दी ईंधन जलाती हैं। बाद में वह सिर्फ रफ्तार के सहारे ही तैरती हैं।
खास देशों की लिस्ट में शामिल हुआ भारत
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘इस सफल प्रदर्शन ने भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल कर दिया है, जिनके पास यह तकनीक है, जो लंबी दूरी की हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों को विकसित करने में सक्षम बनाती है। जिससे प्रतिद्वंद्वियों पर सामरिक बढ़त हासिल होती है।’ इसमें कहा गया कि नोजल-लेस बूस्टर, एसएफडीआर मोटर और ईंधन प्रवाह नियंत्रक सहित सभी उप-प्रणालियों ने प्रारंभिक रूप से ‘ग्राउंड बूस्टर मोटर’ से संचालित किए जाने के बाद अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन किया।
इस परीक्षण की निगरानी डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा की गई, जिनमें रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला, उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला, अनुसंधान केंद्र इमारत और आईटीआर शामिल हैं।
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