
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका (India and America) के बीच ऐतिहासिक व्यापार समझौते (Historical Trade Agreements) पर सियासत गरमा गई है। जहां सरकार इसे MSMEs और निर्यातकों के लिए एक बड़ा अवसर बता रही है, वहीं किसान संगठनों (Farmer Organizations) ने इसे किसानों के खिलाफ विश्वासघात करार दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) के द्वारा इस समझौते की घोषणा के बाद, अब इसे लेकर देशभर में घमासान मच गया है।
किसानों का विरोध: “मोदी ने ट्रंप के सामने सिर झुका लिया”
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए इसे ऐतिहासिक विश्वासघात करार दिया है। एसकेएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप के दबाव के सामने बेशर्मी से सिर झुका दिया। संगठन ने प्रधानमंत्री के पिछले साल स्वतंत्रता दिवस पर दिए गए भाषण का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी ने कड़े शब्दों में कहा था कि वह किसानों के हितों की रक्षा के लिए किसी भी कीमत पर तैयार हैं।
एसकेएम का दावा है कि इस समझौते के परिणामस्वरूप अमेरिका को भारतीय बाजार में अपने अत्यधिक सब्सिडी वाले कृषि उत्पादों को बेचने का मौका मिलेगा, जिससे भारतीय कृषि क्षेत्र को नुकसान होगा। संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि भारत सरकार अमेरिकी साम्राज्यवाद के दबाव के आगे झुक गई है, और इस व्यापार समझौते के कारण भारतीय किसानों पर विनाशकारी असर पड़ेगा।
अमेरिका से आयात और निवेश का गणित
इस व्यापार समझौते के तहत, अमेरिका भारतीय सामान पर लगाए गए जवाबी टैरिफ को 50% से घटाकर 18% करने पर सहमत हुआ है। इसके परिणामस्वरूप, भारतीय MSMEs और निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बड़ी राहत मिलेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि भारत अब अमेरिका से 500 बिलियन डॉलर से अधिक का सामान खरीदेगा।
इसके अलावा, अमेरिका से कच्चे तेल, LNG, हाई-वैल्यू चिप्स, डेटा सेंटर उपकरण, विमान, और परमाणु उपकरणों के आयात में तेजी आने की उम्मीद है। हालांकि, इस समझौते में कृषि उत्पादों, जैसे अनाज, मक्का, सोयाबीन और GM भोजन को बाहर रखा जा सकता है। सरकार ने इस बात का स्पष्ट आश्वासन दिया है कि किसान और पशुपालन से जुड़े लोगों के हितों पर कोई समझौता नहीं किया गया है।
क्या है विशेषज्ञों की राय?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते से भारत को अमेरिका से आयात बढ़ाने के साथ-साथ अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों के लिए नए अवसर मिलेंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी उम्मीद जताई कि इस समझौते से भारतीय निर्यात में तेजी आएगी, विशेषकर उन उत्पादों के लिए जो पहले अमेरिकी टैरिफ के कारण प्रभावित हुए थे।
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