तेहरान। पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच बातचीत की एक अहम पहल सामने आई है। लंबे समय से चली आ रही तल्खी के बावजूद दोनों देश पहली बार सीधे संवाद की मेज पर बैठने जा रहे हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, एक क्षेत्रीय राजनयिक ने बताया कि अमेरिका-ईरान के बीच परमाणु वार्ता शुक्रवार को ओमान में होने की संभावना है।
यह वार्ता ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मध्य पूर्व में सैन्य तैनाती बढ़ा दी है। ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि समझौता न होने की स्थिति में “गंभीर परिणाम” हो सकते हैं। इस बयान के बाद दोनों देशों के बीच हवाई हमलों की धमकियां तेज हो गई थीं और हालात व्यापक युद्ध की ओर बढ़ते दिख रहे थे।
मिसाइल कार्यक्रम पर अडिग ईरान
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा। तेहरान ने इसे वार्ता की “लक्ष्मण रेखा” करार दिया है। एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, एक अरब सूत्र ने बताया कि ईरान के आग्रह पर अमेरिका ने तुर्की की बजाय ओमान में वार्ता करने पर सहमति जताई है। हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि इस बातचीत में अन्य अरब या मुस्लिम देश शामिल होंगे या नहीं।
तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने अरब सागर में विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन के पास आ रहे एक ईरानी ड्रोन को मार गिराया। वहीं, व्हाइट हाउस में ट्रंप ने स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच संवाद चल रहा है, हालांकि उन्होंने वार्ता के स्थान और स्वरूप पर कोई विवरण नहीं दिया।
सूत्रों के अनुसार, संभावित बातचीत में ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची शामिल हो सकते हैं। पहले यह अनुमान लगाया जा रहा था कि सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, मिस्र और यूएई जैसे देश भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगे, लेकिन अब तेहरान केवल अमेरिका के साथ द्विपक्षीय बातचीत पर जोर दे रहा है।
घरेलू अशांति और अमेरिकी दबाव
अमेरिका की बढ़ी हुई नौसैनिक मौजूदगी ईरान में हाल ही में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बाद देखी गई है। ये प्रदर्शन 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद सबसे हिंसक माने जा रहे हैं। ट्रंप ने एक ओर हस्तक्षेप की धमकी दी, तो दूसरी ओर ईरान से परमाणु रियायतों की मांग भी की।
ईरानी नेतृत्व इस बात को लेकर चिंतित बताया जा रहा है कि अगर अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की, तो पहले से नाराज जनता बड़े पैमाने पर सड़कों पर उतर सकती है, जिससे सरकार की पकड़ कमजोर पड़ सकती है।
समुद्र में बढ़ता टकराव
तनाव उस वक्त और बढ़ गया जब अमेरिकी एफ-35 लड़ाकू विमान ने एक ईरानी शाहेद-139 ड्रोन को मार गिराया। उधर, ईरान की तसनीम न्यूज एजेंसी ने अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में ड्रोन से संपर्क टूटने की पुष्टि की, लेकिन वजह नहीं बताई।
इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की नौकाओं और ड्रोन ने अमेरिकी ध्वज वाले एक तेल टैंकर को कथित तौर पर घेरने की कोशिश की। हालांकि, टैंकर ने रफ्तार बढ़ाकर खुद को सुरक्षित निकाल लिया।
2025 की बमबारी की छाया अब भी कायम
गौरतलब है कि जून 2025 में अमेरिका ने इजरायल के साथ मिलकर 12 दिनों तक ईरानी परमाणु ठिकानों पर बमबारी की थी। इसके बाद ईरान ने दावा किया था कि उसका यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम ठप हो गया है।
रॉयटर्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने वार्ता दोबारा शुरू करने के लिए तीन शर्तें रखी थीं—यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करना, बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक और क्षेत्रीय प्रॉक्सी समूहों को समर्थन खत्म करना। ईरान इन मांगों को अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानता है, हालांकि सूत्रों का कहना है कि मिसाइल कार्यक्रम इस वार्ता में सबसे बड़ी अड़चन बना हुआ है।
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