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“अनिल अंबानी ने SC को दिया वचन, बोले- ‘ED-CBI जांच के बीच देश नहीं छोड़ूंगा'”

February 05, 2026

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को रिलायंस कम्युनिकेशंस (Reliance Communications- RCom) और अनिल धीरभाई अंबानी ग्रुप (Anil Dhirubhai Ambani Group-ADAG) से जुड़े ₹40,000 करोड़ के कथित बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में एक कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को इस मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया और साथ ही उद्योगपति अनिल अंबानी ( (Anil Ambani) को एक अहम वचन देने को कहा कि वे बिना अनुमति के भारत नहीं छोड़ेंगे।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ई.ए.एस. सरमा के वकील, प्रशांत भूषण ने चिंता व्यक्त की कि धोखाधड़ी के बड़े पैमाने को देखते हुए मुख्य आरोपी, अनिल अंबानी, देश छोड़कर भाग सकते हैं। इस पर अंबानी के वकील मुकुल रोहतगी ने अदालत को आश्वस्त किया कि “मेरे मुवक्किल का देश छोड़ने का कोई इरादा नहीं है। वे प्रतिदिन अपने कार्यालय जाते हैं और मैं वचन देता हूं कि वे बिना अदालत की अनुमति के विदेश नहीं जाएंगे।”

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अदालत को याद दिलाया कि पहले भी एक वचन दिया गया था, लेकिन वह व्यक्ति अंततः देश से भाग गया था। सरकार ने बताया कि अंबानी के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर पहले से जारी है, ताकि उनके विदेश जाने के प्रयास को रोका जा सके।


  • मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी.वाई. चंद्रचूड़ की अगुवाई में सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसियों द्वारा की गई देरी पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि फोरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट 2020 में आई थी, लेकिन CBI ने प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में 2025 तक का समय लिया।

    अदालत ने जांच एजेंसी से निर्देश दिया कि बैंक अधिकारियों के साथ मिलीभगत के हर मामले के लिए अलग-अलग FIR दर्ज की जाए। इसके अलावा, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि बैंक अधिकारियों के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए कानूनी अनुमति की आवश्यकता नहीं है और यदि कोई अधिकारी धोखाधड़ी या साजिश में शामिल है, तो उसे तुरंत कार्रवाई का सामना करना चाहिए।

    IBC का दुरुपयोग:
    सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (IBC) का इस्तेमाल परिसंपत्तियों को कम मूल्य पर खरीदने के लिए किया जा रहा है। प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि RCom पर ₹47,000 करोड़ का बकाया था, लेकिन उसकी संपत्तियां केवल ₹430 करोड़ में (मुकेश अंबानी की कंपनी द्वारा) खरीदी गईं। अदालत ने इसे IBC का दुरुपयोग करार दिया और कहा कि नीलामी प्रक्रिया पूर्व-नियोजित लगती है।

    ईडी का बयान:
    ईडी ने अदालत को सूचित किया कि अब तक 204 संपत्तियों को कुर्क किया जा चुका है, जिनकी कीमत लगभग ₹12,012 करोड़ है। हाल ही में, रिलायंस ग्रुप के पूर्व निदेशक पुनीत गर्ग को गिरफ्तार किया गया है, जो 7 फरवरी तक हिरासत में रहेंगे। अब सुप्रीम कोर्ट इस मामले की खुद निगरानी करेगा और जांच एजेंसियों को चार सप्ताह के भीतर ताजा स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर मामले में कड़ी कार्रवाई का संकेत दिया और जांच एजेंसियों को शीघ्रता से कार्रवाई करने की हिदायत दी है।

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