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इंदौर: अब बीएलओ ऑन द स्पॉट करेंगे मतदाता का फैसला

February 05, 2026

  • ऐप में जरूरी सुधार किए, आयोग ने10 फरवरी तक सूची पूर्ण करने के निर्देश दिए

इंदौर। मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाने की दिशा में निर्वाचन आयोग ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) मौके पर ही मतदाताओं से जुड़ी आपत्तियों और तार्किक गलतियों का निराकरण करेंगे। आयोग ने ऐसे सभी मामलों की सुनवाई और आवश्यक सुधार के लिए 10 फरवरी तक की समय-सीमा तय की है। हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सभी जिलों को इसके स्पष्ट निर्देश दिए गए थे।

इस प्रक्रिया को और प्रभावी बनाने के लिए बीएलओ एप में भी महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। अब बीएलओ अपने मोबाइल या टैबलेट के माध्यम से ऑनलाइन ही आवश्यक दस्तावेजों को तुरंत स्कैन कर अपलोड कर सकेंगे। साथ ही मतदाता से संबंधित जरूरी जानकारी भी एप के जरिए सीधे साझा की जाएगी। आने वाले 6 दिन मतदाता सूची में तार्किक त्रुटि वाले आवेदकों की सुनवाई तेजी से की जाएगी चुनाव आयोग ने निर्देश दिए हैं कि 10 फरवरी तक सभी मतदाताओं का दस्तावेज सत्यापन और वेरिफिकेशन कर लिया जाए इसलिएअब प्रक्रिया तेज होगी और बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।


  • प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव झा की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट कार्यालय में विशेष गहन पुनरीक्षण (स्ढ्ढक्र)-2026की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में कलेक्टर शिवम वर्मा, अपर कलेक्टर श्री नवजीवन पवार, संयुक्त कलेक्टर श्री अजीत कुमार श्रीवास्तव सहित जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।

    हर स्तर पर मॉनीटरिंग
    बैठक में श्री झा ने इंदौर जिले में चल रहे स्ढ्ढक्र-2026 कार्यों की प्रगति की समीक्षा की और अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरे किए जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रत्येक स्तर पर सतत मॉनिटरिंग की जाए, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही न हो।मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कलेक्टर वर्मा को साफ निर्देश दिए है कि बीएलओ द्वारा किए जा रहे काम पर नजर रखे।

    फार्म भरने की स्थिति और हटाए गए नाम
    जिले में कुल 28.67 लाख मतदाता पंजीकृत थे। 4 नवंबर से 18 दिसंबर तक फार्म भरवाए गए, जिसमें 24.20 लाख मतदाताओं ने फार्म भरकर जानकारी दी। जिसमे से 5 लाख 79 हजार की एंट्री में कई तरह की गलतियां सामने आई थी जिन्हें सुधार करने के निर्देश आयोग ने सूची सहित दिए थे वहीं इंदौर में 1.33 लाख मतदाताओं की 2003 की सूची से मैपिंग नहीं हो सकी, जबकि 4.47 लाख मतदाताओं के फार्म नहीं आने पर उनके नाम प्रारूप सूची से हटाए गए हैं। इनमें स्थानांतरित, मृतक और पते पर नहीं मिलने वाले मतदाता शामिल हैं।

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