
इंदौर। अभी 31 दिसम्बर 2025 को इंदौर सहित प्रदेश के सभी 52 जिलों की सीमाओं को भी फ्रीज कर दिया, जिसके चलते नए जिले, उपखंड या तहसीलें नहीं बन सकेंगी, जब तक कि जनगणना-2027 की प्रक्रिया पूरी ना हो जाए। केन्द्र सरकार के नोटिफिकेशन के बाद सभी राज्यों में जनगणना की तैयारियां शुरू कर दी है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में मध्यप्रदेश सरकार ने भी हाई पॉवर कमेटी गठित कर दी है, तो जिलास्तरीय जनगणना कमेटी कलेक्टर द्वारा गठित की गई और चार मास्टर ट्रेनर भी नियुक्त किए हैं। 1 अप्रैल से इंदौर जिले में भी मकानों की गणना का अभियान शुरू होगा और उसके बाद दूसरे चरण में आबादी की गिनती 1 फरवरी 2027 से शुरू होगी। इस बार डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें डेढ़ लाख से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी प्रदेशभर में लगाई जाएगी।
15 साल बाद जनगणना होने जा रही है। दरअसल, जाति जनगणना की मांग को लेकर मामला उलझा रहा और उसके बाद तय किया गया कि इसकी जनगणना भी होगी। मगर अभी केन्द्र सरकार ने इसके कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं भिजवाए हैं। अलबत्ता जनगणना 2027 को कराने का निर्णय अवश्य लिया गयाा। इसके पहले 2011 में जनगणना हुई थी, जिसमें इंदौर जिले में लगभग साढ़े 6 लाख मकान पाए गए। यानी इतने परिवार शहर और ग्रामीण क्षेत्र में निवासरत मिले। आबादी की बात की जाए तो तब इंदौर की जनसंख्या 32 लाख 76 हजार 697 मानी गई थी, जिसमें पुरुष जनसंख्या 16 लाख 99 हजार 627 और महिला जनसंख्या 15 लाख 77 हजार 70 थी और इंदौर की औसत साक्षरता दर 80.87 पाई गई। धर्म संबंधित जो डाटा सामने आया था, उसमें 83.26 फीसदी हिन्दू और 12.67 फीसदी मुस्लिम और उसके बाद अन्य आबादी बताई गई।
अब अनुमान है कि जिले की आबादी जहां 50 लाख का आंकड़ा पार कर सकती है तो मकानों की संख्या भी 10 लाख या इससे अधिक पहुंच जाएगी, क्योंकि पिछले 5 सालों में ही इंदौर का तेजी से विस्तार चारों दिशाओं में हुआ और आबादी के साथ-साथ नई कॉलोनी, टाउनशिप और बस्तियां भी विकसित हो गईं। इंदौर-उज्जैन रोड से लेकर सुपर कॉरिडोर, बायपास, खंडवा सहित सभी दिशाओं में इंदौर तेजी से फैला है। अब चूंकि जनगणना की प्रक्रिया शुरू होना है, जिसकी शासन -प्रशासन ने तैयारी शुरू कर दी है। कलेक्टर की अध्यक्षता में जिलास्तरीय जनगणना समिति भी गठित हो गई और अब चार मास्टर ट्रेनरों को भोपाल में प्रशिक्षण दिया जाएगा। उसके पश्चात अन्य ट्रेनरों की नियुक्ति की जाएगी। जनगणना के लिए शहरी क्षेत्र में निगमायुक्त को जिम्मा सौंपा गया है, तो ग्रामीण क्षेत्र में सीईओ जिला पंचायत इसकी जिम्मेदारी निभाएंगे।
केन्द्र सरकार द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक इंदौर जिले में मकानों की गणना शुरू होगी, जिसमें सम्पूर्ण निगम क्षेत्र के साथ-साथ पंचायत का क्षेत्र भी शामिल रहेगा। नगर निगम के सम्पत्ति कर और बिजली कम्पनी के कनेक्शनों के साथ-साथ व्यापारिक लाइसेंस सहित डायवर्शन सहित और अन्य माध्यमों से भी आंकड़ों का मिलान किया जाएगा। इस बार डिजिटल जनगणना होगी और इसमें नियुक्त कर्मचारियों को मोबाइल एप के माध्यम से डाटा एकत्रित करना होगा और जनगणना को भी स्वगणना का विकल्प मिलेगा। यानी ऑनलाइन भी जानकारी दी जा सकेगी। अभी पिछले दिनों ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बैठक लेकर जनगणना की तैयारियों की समीक्षा भी की और मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में हाई पॉवर स्टेट लेवल कमेटी का गठन भी किया, जिसमें आधा दर्जन अतिरिक्त मुख्य सचिव, तीन प्रमुख सचिव और 15 अन्य अधिकारी शामिल रहेंगे।
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