
नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Former President Donald Trump)ने अपनी नई योजना सेव अमेरिका एक्ट(new plan Save America Act) के जरिए अमेरिकी चुनावी प्रक्रिया(American electoral process) में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है ट्रंप का कहना है कि चुनावी प्रणाली (electoral system)में धोखाधड़ी व्याप्त है और इसे सुधारना देश के लिए आवश्यक है उन्होंने रिपब्लिकन सांसदों(Republican lawmakers) से इस एक्ट को जल्द से जल्द पास कराने की अपील की और चेतावनी दी कि अगर इसे लागू नहीं किया गया तो अमेरिका का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा ट्रंप ने कहा कि एक्ट के जरिए वोटर आईडी अनिवार्य करना मतदाता पंजीकरण के लिए नागरिकता प्रमाण(citizenship certificate) की मांग और मेल इन बैलेट पर रोक जैसी व्यवस्था की जाएगी
ट्रंप के इस कदम को वाइट हाउस ने भी समर्थन दिया है प्रवक्ता कैरोलीन लैविट ने कहा कि यह एक्ट सामान्य समझ पर आधारित नीतियों पर आधारित है जिससे अधिकांश अमेरिकी सहमत हैं उन्होंने कहा कि यह बदलाव चुनाव प्रक्रिया को सुरक्षित बनाएगा और देश की लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करेगा मार्च 2025 में ट्रंप ने पहले भी एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे जिसका उद्देश्य चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप रोकना और मतदाताओं की नागरिकता की जांच को कड़ा करना था
हालांकि ट्रंप के प्रस्ताव को डेमोक्रेटिक नेताओं का कड़ा विरोध सामना करना पड़ रहा है वे इसे मध्यावधि चुनावों से पहले राष्ट्रीय स्तर पर चुनाव प्रक्रिया पर नियंत्रण करने का प्रयास मान रहे हैं डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर ने साफ कर दिया है कि वे इस एक्ट के खिलाफ वोट देंगे ट्रंप ने रिपब्लिकनों से कम से कम पंद्रह क्षेत्रों में मतदान प्रक्रिया को अपने नियंत्रण में लेने का आह्वान किया है
विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप के इस कदम से चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा के दावे तो मजबूत हो सकते हैं लेकिन इसके राजनीतिक और कानूनी निहितार्थ काफी गंभीर हो सकते हैं यदि यह एक्ट लागू हुआ तो देश में दोनों प्रमुख दलों के बीच संघर्ष और बढ़ सकता है और राज्यों की पारंपरिक चुनावीय स्वतंत्रता पर भी सवाल उठ सकते हैं ट्रंप का यह प्रयास उनके पहले के चुनावी एजेंडा के अनुरूप है जिसमें मतदाताओं की पात्रता और मतदान प्रणाली को नियंत्रित करना प्रमुख था
इस प्रस्ताव के माध्यम से ट्रंप अपने समर्थकों को यह संदेश दे रहे हैं कि वे चुनावी सुधारों के लिए गंभीर हैं और देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं हालांकि इस कदम के विरोध में विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया और मीडिया की चर्चा इसे चुनावी माहौल में एक नई चुनौती बना रही है

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