वॉशिंगटन। मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान (America and Iran) के बीच बढ़ते तनाव के बीच क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों (US military activities) में तेज़ी देखी गई है। हालिया सैटेलाइट इमेजरी (satellite imagery) से संकेत मिले हैं कि अमेरिका ने ईरान के आसपास स्थित अपने रणनीतिक ठिकानों—विशेष रूप से कतर और जॉर्डन—में सैन्य संसाधनों की तैनाती बढ़ा दी है।
जनवरी की तुलना में फरवरी 2026 में इस बेस पर विमान और उपकरणों की संख्या में वृद्धि देखी गई। सैटेलाइट डेटा में निम्नलिखित सैन्य संसाधनों की मौजूदगी दर्ज की गई!
RC-135 निगरानी (रीकॉनिसेंस) विमान
3 C-130 सैन्य परिवहन विमान
18 KC-135 स्ट्रैटोटैंकर (हवाई ईंधन आपूर्ति विमान)
7 C-17 ग्लोबमास्टर भारी परिवहन विमान
HEMTT वाहनों पर लगे लगभग 10 पैट्रियट एयर डिफेंस यूनिट
जॉर्डन के मुहाफ्फाक एयर बेस पर भी तैनाती में इजाफा
जॉर्डन स्थित मुहाफ्फाक एयर बेस पर भी अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ने के संकेत मिले हैं। सैटेलाइट तस्वीरों में यहां निम्नलिखित प्लेटफॉर्म दिखाई दिए:
F-15E स्ट्राइक ईगल लड़ाकू विमान
A-10 ग्राउंड-अटैक एयरक्राफ्ट
C-17 और C-130 परिवहन विमान
EA-18G ग्रोलर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर विमान
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की मिश्रित तैनाती (लॉजिस्टिक्स + एयर स्ट्राइक + इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर) संभावित संघर्ष की स्थिति में त्वरित ऑपरेशन क्षमता को दर्शाती है।
मोबाइल मिसाइल तैनाती का रणनीतिक अर्थ
रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, मिसाइल सिस्टम को स्थिर ठिकानों की बजाय मोबाइल प्लेटफॉर्म पर रखना इस बात का संकेत है कि अमेरिका संभावित मिसाइल हमलों से बचाव, जवाबी कार्रवाई और लचीलापन (operational flexibility) बढ़ाना चाहता है।
यह कदम क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण में बढ़ते जोखिम और ईरान की मिसाइल क्षमताओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया माना जा रहा है।
ईरान की चेतावनी और बढ़ती मिसाइल क्षमता
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने भी हाल के वर्षों में अपनी बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल क्षमताओं को मजबूत किया है और संकेत दिया है कि किसी भी सैन्य हमले की स्थिति में वह क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकता है। इससे क्षेत्र में शक्ति संतुलन को लेकर तनाव और बढ़ गया है।
क्या है पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम
पैट्रियट (Phased Array Tracking Radar to Intercept on Target – MIM-104) एक लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली है, जिसे निम्न खतरों को रोकने के लिए विकसित किया गया है:
टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल
क्रूज मिसाइल
लड़ाकू विमान
इसे अमेरिकी कंपनियां रेथियॉन और लॉकहीड मार्टिन विकसित करती हैं। यह प्रणाली तेज़ी से लक्ष्य का पता लगाकर इंटरसेप्शन कर सकती है और हाई-अलर्ट स्थितियों में अपनी लोकेशन बदलने में सक्षम होती है।
यह अमेरिका सहित कई सहयोगी देशों—जैसे जर्मनी, जापान, इज़राइल, सऊदी अरब, कतर, यूएई, पोलैंड, दक्षिण कोरिया और स्पेन—द्वारा उपयोग की जाती है।
पहले भी संघर्ष क्षेत्रों में हो चुका है इस्तेमाल
पैट्रियट सिस्टम का इस्तेमाल 2003 के इराक युद्ध के दौरान कुवैत में किया गया था, जहां PAC-3 मिसाइलों के माध्यम से सतह से दागी गई मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया।
साल 2019 में सऊदी अरब की तेल सुविधाओं पर ड्रोन हमलों के बाद अमेरिका ने वहां अतिरिक्त पैट्रियट बैटरी और THAAD (Terminal High Altitude Area Defense) सिस्टम भी तैनात किए थे।
क्षेत्रीय संकेत: तैयारी या दबाव की रणनीति?
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह तैनाती सीधे युद्ध की घोषणा नहीं, बल्कि “डिटरेंस” यानी प्रतिरोधक रणनीति का हिस्सा भी हो सकती है—जिसका उद्देश्य संभावित हमले को रोकना और क्षेत्रीय सहयोगियों को सुरक्षा आश्वासन देना है।
निष्कर्ष
सैटेलाइट इमेजरी में सामने आए ये सैन्य संकेत मिडिल ईस्ट में बढ़ती सामरिक प्रतिस्पर्धा और अनिश्चितता को दर्शाते हैं। आने वाले समय में कूटनीतिक बातचीत, क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरण और सैन्य संतुलन इस तनाव की दिशा तय करेंगे।
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