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ट्रेड डील की फैक्टशीट में बदलाव क्यों? विदेश मंत्रालय ने दी सफाई, बताया-आपसी सहमति से हुए संशोधन

February 13, 2026

umpनई दिल्ली। भारत (India) और अमेरिका (United States) के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते की फैक्टशीट में हालिया बदलावों को लेकर उठे सवालों पर भारत सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। सरकार का कहना है कि दस्तावेज़ में किए गए सभी संशोधन दोनों देशों की आपसी सहमति से हुए हैं और यह साझा समझ को ही दर्शाते हैं। विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि यह कोई एकतरफा बदलाव नहीं, बल्कि चल रही बातचीत की प्रक्रिया का हिस्सा है।

विदेश मंत्रालय ने क्या कहा

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने मीडिया को बताया कि दोनों देशों के बीच पारस्परिक लाभ को ध्यान में रखते हुए एक अंतरिम समझ बनी थी, जिसे संयुक्त बयान के रूप में जारी किया गया था।

उनके मुताबिक: वही संयुक्त बयान (फैक्टशीट) दोनों देशों की मौजूदा समझ का आधार है।
अमेरिका की ओर से किए गए संशोधन भी उसी सहमति के अनुरूप हैं।बातचीत अभी जारी है और समझौते के विभिन्न पहलुओं पर आगे भी काम हो रहा है।



  • बदलाव को लेकर विवाद क्यों हुआ
    यह मुद्दा तब चर्चा में आया जब White House ने 10 फरवरी को जारी फैक्टशीट में कुछ संशोधन कर दिए।

    संशोधित दस्तावेज़ में:
    भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ कम या समाप्त करने की सूची से कुछ दालों को हटा दिया गया।

    पहले जहां भारत के 500 अरब डॉलर की खरीद के लिए “प्रतिबद्ध” होने का उल्लेख था, उसे बदलकर “इरादा रखता है” (intends) कर दिया गया।

    पहले क्या कहा गया था
    संशोधन से पहले जारी संस्करण में यह उल्लेख था कि भारत औद्योगिक वस्तुओं तथा अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों पर टैरिफ कम या समाप्त करने की दिशा में सहमत हुआ है।
    बाद के बदलावों ने भाषा को अधिक लचीला बनाया, जिससे इसे औपचारिक बाध्यता की बजाय वार्ता-आधारित समझ माना जा रहा है।

    लंबी वार्ता के बाद बनी है सहमति
    दोनों देशों के बीच यह समझौता कई दौर की बातचीत और महीनों चली चर्चाओं के बाद सामने आया।
    व्यापार, कृषि, बाज़ार पहुंच और निवेश जैसे मुद्दों पर अभी भी वार्ता जारी है, इसलिए इसे अंतरिम व्यवस्था माना जा रहा है, न कि अंतिम व्यापक व्यापार समझौता।

    आगे क्या संकेत
    विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देश व्यापक व्यापार समझौते की दिशा में चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। संवेदनशील क्षेत्रों-खासतौर पर कृषि-पर भारत सावधानी बरत रहा है।

     

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