वाशिंगटन। भारत और अमेरिका (India-United States) के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (Trade agreements) में भारतीय निर्यातकों को बड़ा फायदा मिल सकता है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल (Piyush Goyal) ने कहा कि भारत को वही रियायती टैरिफ व्यवस्था मिल सकती है, जो फिलहाल Bangladesh को दी जा रही है।
क्या है ‘जीरो टैरिफ’ का फॉर्मूला?
मंत्री ने स्पष्ट किया कि अमेरिका बांग्लादेशी वस्त्रों पर शुल्क में बड़ी कटौती करता है, लेकिन पूरी तरह शुल्क-मुक्त प्रवेश तभी मिलता है जब परिधान अमेरिकी कपास या कृत्रिम रेशों से तैयार किए गए हों। इसी मॉडल को भारत-अमेरिका समझौते में भी शामिल किए जाने की संभावना है।
गोयल के अनुसार, यदि भारतीय कंपनियां अमेरिका से धागा या कपास खरीदकर वहीं के बाजार के लिए परिधान तैयार करती हैं, तो उन्हें भी उसी तरह ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिलेगा जैसा बांग्लादेशी कंपनियों को मिलता है।
मंत्री ने कहा कि इस व्यवस्था से भारतीय कपास किसानों को नुकसान नहीं होगा, क्योंकि अमेरिका का कपास उत्पादन सीमित है और उसका निर्यात भी अपेक्षाकृत कम है।
भारत का लक्ष्य वस्त्र निर्यात को बड़े स्तर पर बढ़ाना है, जो इस तरह की व्यवस्था से और मजबूत हो सकता है।
मार्च से लागू हो सकता है समझौते का पहला चरण
भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के शुरुआती चरण के लिए रूपरेखा तैयार कर ली है। इसे जल्द लागू किए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिससे टेक्सटाइल सेक्टर को तत्काल लाभ मिल सकता है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
इस प्रस्तावित समझौते को लेकर राहुल गांधी ने आलोचना करते हुए आरोप लगाया था कि यह भारत के हितों से समझौता कर सकता है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह समझौता निर्यात और उद्योग दोनों के लिए अवसर पैदा करेगा।
मेडिकल उपकरण उद्योग को भी मिलेगा फायदा
एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि भारत के कई मुक्त व्यापार समझौते (FTA) घरेलू मेडिकल डिवाइस उद्योग को नए बाजारों तक पहुंच देंगे।
National Industrial Corridor Development Corporation (NICDC) देश में मेडिकल उपकरण निर्माण इकाइयों के लिए 50 से 100 एकड़ तक भूमि आरक्षित करने पर विचार कर रहा है। कुल मिलाकर, प्रस्तावित व्यापार समझौते का लक्ष्य भारतीय निर्यात को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बढ़त देना है—लेकिन अमेरिकी कच्चे माल के उपयोग जैसी शर्तें पूरी करना इसकी अहम कुंजी होगी।
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