मुंबई/शाहजहांपुर। तिहाड़ (Tihar) में 12 दिन बिताने के बाद अंतरिम जमानत पर बाहर आए अभिनेता राजपाल यादव (Rajpal Yadav) ने जेल व्यवस्था और कैदियों के भविष्य पर खुलकर बात की। चेक बाउंस मामले (Check Bounce cases) में रिहाई के बाद शाहजहांपुर पहुंचे यादव ने कहा कि सलाखों के पीछे बिताया समय उनके लिए “बुरे सपने जैसा” रहा, लेकिन उसी अनुभव ने उन्हें कैदियों की स्थितियों पर सोचने के लिए मजबूर किया।
“कैदियों को भी मिले एक लाइफलाइन”
यादव ने लोकप्रिय टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति का उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे उसमें प्रतिभागियों को तीन लाइफलाइन मिलती हैं, वैसे ही सरकार को लंबे समय से सजा काट रहे कैदियों के लिए “एक लाइफलाइन” जैसी मानवीय व्यवस्था पर विचार करना चाहिए।
उनका सुझाव है कि 10–15 साल से सजा काट रहे कैदियों के मामलों में दया या पुनर्विचार की व्यवस्था हो, ताकि सुधार की संभावना को मौका मिले।
स्मोकिंग जोन की मांग भी उठाई
राजपाल यादव ने जेलों में स्मोकिंग जोन की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया। उनका तर्क था कि जब एयरपोर्ट और रेलवे स्टेशनों पर यह सुविधा उपलब्ध है, तो जेलों में नशे के आदी कैदियों के लिए नियंत्रित स्थान क्यों न हों। हालांकि, इस मांग पर सोशल मीडिया में मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
सोशल मीडिया पर बहस
अभिनेता के बयान के बाद जेल सुधार, दया याचिका और कैदियों के पुनर्वास जैसे मुद्दों पर चर्चा तेज हो गई है। कुछ लोग उनके अनुभव-आधारित सुझावों का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ इसे संवेदनशील विषय मानते हुए कानूनी प्रक्रिया के दायरे में देखने की बात कह रहे हैं।
तिहाड़ में बिताए 12 दिनों ने राजपाल यादव के नजरिए को बदला है। अब वे जेल व्यवस्था में सुधार और मानवीय दृष्टिकोण की वकालत करते नजर आ रहे हैं।

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