
कलेक्टर के आदेश पर तहसीलदार जूनी इंदौर कोर्ट से पारित हुआ महत्वपूर्ण आदेश, रेसीडेंसी एरिया सर्वे के दौरान पकड़ में आया बड़ा भू-घोटाला
इंदौर, राजेश ज्वेल
जिला प्रशासन (District Administration) ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए 100 करोड़ रुपए (worth Rs 100 crore) मूल्य की बेशकीमती नजूल जमीन (Nazul land) को कब्जे में लेने की प्रक्रिया शुरू की है। शहर के मध्य क्षेत्र में ढक्कनवाला कुआं (Dakkanwala Kuan) एमवाय अस्पताल के पीछे स्थित मस्जिद (mosque) और मुसाफिरखाने (rest house) के नाम पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण कर लिया गया और मौके पर 40 हजार स्क्वेयर फीट जमीन पर कब्जा पाया गया, जिसके चलते कलेक्टर के आदेश पर अपर तहसीलदार जूनी इंदौर कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए बेदखली की कार्रवाई शुरू करने को कहा और मौके पर आज निर्माण भी हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। कुछ समय पूर्व प्रशासन ने रेसीडेंसी एरिया का सर्वे भी करवाया था, जिसमें रतलाम कोठी और उसके आगे का हिस्सा भी शामिल है और उसी सर्वे के चलते एमवाय अस्पताल के पीछे सीआरपी लाइन के अनसर्वर्ड ब्लॉक क्रमांक 6, 11 और पर यह अतिक्रमण पाया गया।
रेसीडेंसी एरिया सर्वे के बाद संबंधित जमीन मालिकों को नोटिस जारी कर उनसे दस्तावेज मांगने की प्रक्रिया भी प्रशासन ने शुरू की है। वहीं दूसरी तरफ कस्बा इंदौर में सीआरपी लाइन के पीछे ब्लॉक नम्बर 12 की जमीन नजूल भूमि के रूप में दर्ज है। इस पर एक मस्जिद निर्माण के अलावा बाउण्ड्रीवाल भी बनाई गई, जबकि कुछ वर्ष पूर्व यहां पर छोटी-सी मस्जिद थी और आसपास की जमीन खाली पड़ी थी, जिस पर पिछले कुछ समय में अतिक्रमण करते हुए मुसाफिरखाने के साथ बाउण्ड्रीवॉल का निर्माण भी कर लिया गया। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर पिछले दिनों न्यायालय अपर तहसीलदार जूनी इंदौर द्वारा वक्फ बोर्ड और मस्जिद अध्यक्ष को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए थे और इसके जवाब में कहा गया कि उक्त भूमि1967 से ही मस्जिद और वक्फ बोर्ड के नाम से ही रही है, जिसका कुल क्षेत्रफल 30400 वर्गफीट है और कलेक्टर द्वारा 1994 को अनापत्ति भी दी थी और उक्त सम्पत्ति पर सेंट्रल वक्फ काउंसिल द्वारा अंजूम ईस्लाहुल मुसलमिन छावनी जामा मस्जिद के नाम से 80 लाख रुपए का लोन भी लिया गया, जिसकी सालाना 6 लाख रुपए की किश्त भी जमा कराई जाती है। इस प्रकरण में नगर निगम के भवन अधिकारी से भी प्रशासन ने रिपोर्ट मांगी, जिसमें बताया गया कि मुसाफिरखाने के निर्माण के लिए 2003 में भवन अनुज्ञा जारी की गई और परीक्षण में यह पाया गया कि 1985 में पुलिस लाइन छावनी मस्जिद 3040 वर्गफीट जमीन खसरा नम्बर 12 पर अंकित होकर पीडब्ल्यूडी द्वारा भी इस पर एनओसी दी गई थी। प्रशासन ने अपनी जांच के पांच बिन्दुओं की जो विस्तृत जांच की उसमें पाया गया कि गूगल सेटेलाइट ईमेज से भी यह प्रमाणित हुआ कि उक्त भूमि पर निर्माण 300 वर्गफीट में हुआ था और बाद में मस्जिद की मूल संरचना की आड़ में बाउण्ड्रीवाल बनाकर नया निर्माण और विस्तार किया गया। शासकीय जमीन पर बिना अनुमति इस तरह का अवैध निर्माण स्पष्टत: नियमों का उल्लंघन है और भू-राजस्व संहिता की धारा 57 के तहत जो भूमि निजी स्वामित्व में सिद्ध नहीं हो वह शासन की मानी जाएगी, जिसके चलते धारा 248 के तहत तहसीलदार द्वारा प्राप्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए अनसर्वर्ड रेसीडेंसी स्थित ब्लॉक नम्बर 11-12 और वर्तमान सर्वे उपरांत ब्लॉक नम्बर 38 पर अनाधिकृत कब्जा प्रमाणित पाया गया है। अत: प्रश्राधीन भूमि पर निर्मित मस्जिद की मूल संरचना एवं मुसाफिरखाना के अतिरिक्त बनी बाउण्ड्रीवाल तथा अन्य निर्माणों के लिए बेदखली आदेश पारित किया जाता है। मुसाफिरखाने के निर्माण की अनुमति भवन अधिकारी निगम द्वारा तथा पूर्व में कलेक्टर द्वारा जारी एनओसी के आधार पर की गई। उस पर नियमानुसार कार्रवाई के लिए अलग से पत्र जारी किए जाएंगे। अतिक्रमण को तीन दिन में हटाकर कब्जा सौंपने के आदेश भी दिए गए।
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