
नई दिल्ली: असम (Assam) में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) होने हैं और यहां पर भी सियासी पारा हाई होता जा रहा है. राजनीतिक (Political) हमले भी बढ़ते जा रहे हैं. अब असम के कांग्रेस (Congress) अध्यक्ष गौरव गोगोई (Gaurav Gogoi) ने राज्य की बीजेपी सरकार (BJP Goverment) पर आरोप लगाया कि हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) की अगुवाई वाली सरकार तानाशाही कर रही है और दावा किया कि राज्य में होने वाले विधानसभा चुनाव में लोगों और ‘राजा’ (King) के बीच ही असली लड़ाई होगी.
साथ ही उन्होंने यह भी दावा किया कि लोकतंत्र का एक अहम हिस्सा, लोगों का आलोचना करने का अधिकार, बीजेपी के नेतृत्व वाली यह गठबंधन सरकार छीन रही है. गोगोई ने कल शुक्रवार को डिब्रूगढ़ जिला नागरिक मंच की ओर से आयोजित ‘गण अभिबर्थन’ (जन सम्मेलन) को संबोधित करते हुए कहा, “यह चुनाव असम के लोगों और राजा (शासक) के बीच होगा,” क्योंकि राज्य में फिर से चुनावी सीजन आ गया है. इस सम्मेलन में असम जातीय परिषद के अध्यक्ष लुरिंज्योति गोगोई, राइजर दल के महासचिव धैर्य कोंवर समेत अन्य विपक्षी नेता भी मौजूद थे.
राज्य में इस बार विधानसभा चुनाव मार्च-अप्रैल में कराए जाने की संभावना है. सांसद गौरव गोगोई ने जोर देकर कहा कि संविधान ने नागरिकों को न केवल वोट देने का अधिकार दिया है, बल्कि सरकार की आलोचना करने का अधिकार भी दिया है.
सरमा की बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “सवाल पूछने के अधिकार के बिना लोकतंत्र संभव ही नहीं है. नागरिकों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि सरकार स्वास्थ्य, शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रों में किस तरह का काम कर रही है. लेकिन यह सरकार जनता को सशक्त बनाना ही नहीं चाहती. उनकी राजनीतिक विचारधारा पुराने राजाओं जैसी है. दिल्ली में एक महाराजा बैठा है, और हर उस राज्य में जहां वे सत्ता में हैं, उन्होंने एक राजा बिठा रखा है.”
कांग्रेस नेता ने सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की तुलना एक ऐसे शासक से की जो खुद को दयालु दिखाने के लिए कभी-कभी प्रजा के बीच मुफ्त की चीजें बांटता रहता है. उनका कहना है, “योजनाओं के जरिए से जनता को चीजें बांटना हर सरकार का कर्तव्य है. लेकिन इस बार, हम देख रहे हैं कि शर्तें लगाई जा रही हैं. अगर आप लाभ लेना चाहते हैं, तो आप दूसरी पार्टी के नहीं हो सकते, आप दूसरी पार्टी की बैठक में शामिल नहीं हो सकते, सवाल या आलोचना भी नहीं कर सकते.” उन्होंने कहा कि यह उनका व्यवहार है, यह उनका अहंकार है”.
बीजेपी पर धमकियों और डराने-धमकाने से सरकार चलाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस सांसद तरुण गोगोई ने कहा, “दिल्ली और दिसपुर में बैठे लोग हमेशा बैठे नहीं रह सकते. अगर लोग एकजुट हो जाएं और सतर्क हो जाएं, तो वे इन नेताओं को एक सेकंड में उखाड़ फेंक सकते हैं. लेकिन इसके लिए लोगों को एकजुट होना होगा.”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जब भी लोग एकजुट होने की कोशिश करते हैं, तो सरकार बांटने वाली राजनीति का सहारा लेने लग जाती है. उन्होंने कहा, “कभी धर्म के नाम पर, कभी भाषा के नाम पर, कभी अपर असम-लोअर असम, कार्बी और गैर-कार्बी, बोडो और गैर-बोडो, मिसिंग और अहोम, मोरान और चुटिया के नाम पर, बीजेपी फूट डालकर एकता को खत्म करने की कोशिश करती है.”
सीएम सरमा कांग्रेस नेता गौरव गोगोई पर लगातार हमलावर रहे हैं, सरकार पर वार करते हुए गोगोई ने यह भी कहा, “जागरूक नागरिकों को आगे आना चाहिए और उन्हें जागरूकता फैलानी चाहिए ताकि आम लोग इन साजिशों को समझ सकें.” मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “जहां असम को कल्याण के मामले में टॉप पांच राज्यों में होना चाहिए था, वहीं यह नीचे के पांच राज्यों में है. दूसरी ओर, मुख्यमंत्री भारत के सबसे अमीर मुख्यमंत्रियों की लिस्ट में शामिल हो गए हैं.”
लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता ने असम में चुनावी समीकरण को लेकर दावा करते हुए कहा कि अलग-अलग विपक्षी पार्टियों के बीच गठबंधन होना तय है. उन्होंने कहा, “हमें सबकी जरूरत है. सभी को एकजुट होना चाहिए. यह चुनाव पार्टी बनाम पार्टी नहीं है, न ही विपक्ष बनाम बीजेपी है. यह असम के लोगों और शासक के बीच का चुनाव है.”
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