
सीहोर। मानवता को शर्मसार करने वाली एक घटना में भैरुंदा पुलिस ने उस खौफनाक राज से पर्दा उठा दिया है, जिसने पूरे जिले को झकझोर दिया था। 4 फरवरी को एक 10 साल की बच्ची के साथ हुए तथाकथित सामूहिक दुष्कर्म की कहानी झूठी निकली। असल में मासूम की अस्मत से खिलवाड़ करने वाला कोई बाहरी नहीं, बल्कि उसका सगा नाबालिग मामा ही निकला।
भैरुंदा क्षेत्र में चार दिन पहले 4 फरवरी को जब एक मासूम ने दो बाइक सवारों द्वारा अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म की बात कही, तो इलाके में दहशत फैल गई थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अज्ञात बदमाशों के खिलाफ केस दर्ज किया था। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस को पीड़िता के बयानों में झोल नजर आने लगा। महिला पुलिस अधिकारियों ने बच्ची को विश्वास में लेकर प्यार से पूछताछ तो उसने सिसकते हुए उस दरिंदे का नाम लिया, जो उसका मामा निकला।
जांच में यह बात सामने आई कि 4 फरवरी को जब परिवार और उसका मामा (बाल अपचारी) अपने-अपने घरों के लिए रवाना होने वाले थे, तभी आरोपी ने मौका पाकर मासूम को डराया-धमकाया और उसके साथ कुकर्म किया। आरोपी इतना शातिर था कि उसने अपनी गर्दन बचाने के लिए बच्ची के मन में इस कदर खौफ भर दिया कि उसने पुलिस और परिजनों के सामने अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म की मनगढ़ंत कहानी सुना दी।
पुलिस अधीक्षक दीपक कुमार शुक्ला के निर्देशन में गठित विशेष टीम ने जब घटनास्थल का मुआयना किया, तो वहां परिस्थितियां बच्ची की कहानी से मेल नहीं खा रही थीं। एसडीओपी रोशन जैन और महिला अधिकारियों ने महसूस किया कि बच्ची किसी गहरे दबाव में है। मनोवैज्ञानिक तरीके से की गई पूछताछ में मासूम ने बताया कि रात अधिक होने और घरवालों के डर से मामा ने ही उसे ‘दो अनजान लड़कों’ वाली कहानी रटने को मजबूर किया था।
पुलिस ने जब संदेह के आधार पर नाबालिग मामा को हिरासत में लिया और सख्ती से पूछताछ की, तो उसने न केवल इस घटना को अंजाम देना स्वीकार किया, बल्कि एक और डरावना सच उगला। आरोपी ने कबूल किया कि वह पूर्व में भी कई बार मासूम को अपनी हवस का शिकार बना चुका है। एसडीओपी रोशन जैन ने बताया कि आरोपी की स्वीकारोक्ति के बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर किशोर न्यायालय सीहोर में पेश किया है।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुनीता रावत के मार्गदर्शन में पुलिस ने महज 48 घंटों के भीतर इस अंधे कत्ल जैसी गुत्थी को सुलझा लिया। चूंकि अब यह स्पष्ट हो गया है कि घटना में कोई दूसरा व्यक्ति शामिल नहीं था, इसलिए पुलिस ने प्राथमिकी से सामूहिक बलात्कार की धारा को हटा दिया है। अब आरोपी मामा के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की अन्य सुसंगत धाराओं के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जा रही है। फिलहाल मासूम को संरक्षण में लेकर उसकी काउंसलिंग की जा रही है।

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