
इंदौर । भागीरथपुरा (Bhagirathpura) में गंदे पानी (dirty water) से 15 मौत हो जाने के बाद नगर निगम (Municipal council) द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन (operation) में लापरवाही की नई कहानी निकलकर सामने आई। प्रारंभिक रूप से यह स्पष्ट हुआ है कि 69 बोरिंग (69 borewell) के कनेक्शन को नर्मदा की लाइन (Narmada pipeline) में जोड़ दिया गया।
भागीरथपुरा में गंदे पानी से उल्टी-दस्त के बीमार मरीजों की संख्या लगातार बढऩे के कारण नगर निगम द्वारा पूरी लाइन की जांच शुरू की गई। इस जांच में बहुत सारी गड़बडिय़ां निकलकर सामने आई हैं। दिलीपकुमार यादव ने निगम आयुक्त पद से हटाए जाने से पहले राज्य सरकार को भागीरथपुरा की स्थिति पर विस्तृत प्रतिवेदन भेजा।
1 दिन में मिले सात लीकेज, इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया
कि कल शुक्रवार के दिन भागीरथपुरा में गंदे पानी की सप्लाई का कारण जानने के लिए 14 स्थान पर पाइप लाइन चेक करने का काम किया गया। इन सभी स्थानों पर निगम की टीम द्वारा ठेकेदार के माध्यम से बड़े गड्ढे खुदवाकर लाइन को चेक किया गया। इसमें लाइन में सात स्थानों पर लीकेज मिले हैं। इनमें से एक स्थान पर तो बहुत ही बड़ा लीकेज मिला। वहां पर पूरी पाइप लाइन छलनी हो गई। इस लाइन में इतने सारे छेद हो गए कि उनकी गिनती करना मुश्किल हो गया।
पूरे शहर का होगा सर्वे : भार्गव
राज्य शासन द्वारा जारी किए गए तबादला और निलंबन के आदेश के बाद महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा है कि अब अगले 7 दिन में पूरे शहर में सर्वे कराया जाएगा। यह देखा जाएगा कि कौन-कौन से स्थान पर नर्मदा की लाइन में से लोगों के घर में दूषित और गंदा पानी आ रहा है। इस सर्वे को करने के साथ-साथ ऐसे सारे स्थान पर शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए सुधार कार्य किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा इंदौर को लेकर उठाए गए कदम के अच्छे परिणाम सामने आएंगे। अब समन्वय के साथ जनता के हित में बेहतर कार्य हो सकेगा।
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