वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald trump) ने एक बार फिर यह दावा दोहराया है कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित सैन्य संघर्ष को व्यापारिक टैरिफ (Trade tariff) के दबाव के जरिए रुकवाया था। ट्रंप के अनुसार यह टकराव गंभीर रूप ले सकता था और परमाणु युद्ध (nuclear war) तक पहुंचने की आशंका थी। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और टैरिफ में कमी की घोषणा चर्चा में है।
भारत-पाक स्थिति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दोनों देश “वास्तव में युद्ध की ओर बढ़ रहे थे” और हालात खतरनाक स्तर तक पहुंच सकते थे। उन्होंने दावा किया कि सैन्य झड़पों में कई विमान गिराए गए थे और स्थिति नियंत्रण से बाहर जा सकती थी।
पाकिस्तान नेतृत्व का हवाला
ट्रंप ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने कथित तौर पर उनकी भूमिका की सराहना करते हुए कहा था कि हस्तक्षेप से बड़ी संख्या में लोगों की जान बची। ट्रंप के अनुसार, आर्थिक दबाव के बिना संघर्ष रोकना संभव नहीं था।
पहले भी कर चुके हैं ऐसे दावे
ट्रंप इससे पहले भी कई बार सार्वजनिक रूप से यह कह चुके हैं कि दक्षिण एशिया में तनाव कम कराने में उनकी भूमिका रही। उन्होंने मई माह में सोशल मीडिया के माध्यम से कहा था कि अमेरिकी मध्यस्थता के बाद दोनों देशों ने सैन्य गतिविधियां रोकने पर सहमति जताई थी।
भारत का रुख: तीसरे पक्ष की भूमिका से इनकार
भारत सरकार ने लगातार यह स्पष्ट किया है कि भारत-पाक मुद्दों पर किसी तीसरे देश की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की गई।
भारतीय पक्ष के अनुसार, मई में चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकवादी ढांचों के खिलाफ लक्षित कार्रवाई थी। यह अभियान 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हुई थी।
व्यापार समझौता और टैरिफ में बदलाव
हाल ही में घोषित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए कुछ जवाबी शुल्कों में कमी की है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बताया कि टैरिफ दर को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और व्यापार संबंध मजबूत होंगे।
विश्लेषकों की राय
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के बयान राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन भारत ने औपचारिक रूप से किसी बाहरी मध्यस्थता को स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में इन दावों को लेकर दोनों देशों के आधिकारिक दृष्टिकोण में स्पष्ट अंतर दिखाई देता है।
निष्कर्ष
दक्षिण एशिया में सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी कार्रवाई और आर्थिक कूटनीति के बीच संतुलन हमेशा संवेदनशील रहा है। ट्रंप के हालिया बयान ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या व्यापारिक दबाव वास्तव में रणनीतिक संघर्षों को रोकने का प्रभावी साधन हो सकता है।
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