वॉशिंगटन। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिकी प्रशासन (US administration) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति (Peace in the Indo-Pacific) और संतुलन बनाए रखने के लिए भारत की भूमिका बेहद अहम है। डोनाल्ड ट्रंप (Donald trump) प्रशासन के अधिकारी ने यह भी कहा कि एक मजबूत भारत न केवल भारतीयों बल्कि अमेरिकियों के हित में भी है।
अमेरिकी रक्षा नीति के उप सचिव एलब्रिज कोल्बी ने अनंत केंद्र में अपने संबोधन के दौरान भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी को लेकर चार प्रमुख बिंदु रखे। उन्होंने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में किसी एक शक्ति का प्रभुत्व नहीं होना चाहिए, जिसे विश्लेषक परोक्ष रूप से चीन की ओर संकेत मान रहे हैं।
कोल्बी ने कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने में भारत केंद्रीय भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि आत्मविश्वासी और मजबूत भारत दोनों देशों के लिए लाभदायक है और क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान देगा।
हर मुद्दे पर सहमति जरूरी नहीं
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रभावी सहयोग के लिए भारत और अमेरिका का हर विषय पर सहमत होना जरूरी नहीं है। उनके अनुसार दोनों देशों के रणनीतिक हित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर तेजी से एक जैसे होते जा रहे हैं, जो साझेदारी को मजबूत बनाते हैं।
रक्षा सहयोग पर जोर
कोल्बी ने कहा कि भारत और अमेरिका रक्षा सहयोग को प्रतीकात्मक स्तर से आगे बढ़ाकर वास्तविक क्षमता निर्माण पर ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के हवाले से कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हुए हैं।
उन्होंने लंबी दूरी की सटीक मारक क्षमता, रसद आपूर्ति, पनडुब्बी रोधी युद्ध और उन्नत तकनीक जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता भी जताई।
कोल्बी ने सैन्य उपकरणों के सह-उत्पादन और सह-विकास पर जोर देते हुए कहा कि अमेरिका भारत को रक्षा बिक्री बढ़ाने के साथ-साथ उसके स्वदेशी रक्षा उद्योग को मजबूत करने की महत्वाकांक्षा का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि मजबूत घरेलू रक्षा औद्योगिक आधार संप्रभुता और लचीलेपन को बढ़ाता है।
उन्होंने अंत में कहा कि मतभेदों के बावजूद दोनों देशों के बीच सहयोग जारी रहेगा और यह साझेदारी साझा रणनीतिक हितों पर आधारित है।
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