मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। सोलापुर जिले (Solapur district) के बारशी तालुका (Barshi Taluka) में स्थानीय चुनाव से पहले कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी एकनाथ शिंदे (Eknath Shinde) के नेतृत्व वाली शिवसेना और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (उबाठा) ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के साथ मिलकर भाजपा के खिलाफ साझा मोर्चा बनाया है। इस गठबंधन में शिवसेना, शिवसेना (उबाठा), एनसीपी और शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी (एसपी) शामिल हैं।
राज्य में 12 जिला परिषदों और 125 पंचायत समितियों के चुनाव सात फरवरी को होने हैं। चुनाव से पहले बना यह गठबंधन इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि एक-दूसरे पर तीखे हमले करने वाले अविभाजित शिवसेना के दोनों गुट पहली बार इस तरह एक साथ आए हैं।
हल्के-फुल्के अंदाज में बोलते हुए शिंदे ने कहा कि कई बार विधायक रह चुके दिलीप सोपाल ने “गलत रास्ता चुन लिया”, नहीं तो वे आज मंत्रिमंडल का हिस्सा होते। उनका इशारा 2024 के विधानसभा चुनाव की ओर था, जब सोपाल ने शिंदे गुट के बजाय उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (उबाठा) का साथ दिया था।
गठबंधन सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित
सोलापुर से शिवसेना (उबाठा) के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भाजपा के खिलाफ यह गठबंधन केवल स्थानीय चुनावों तक सीमित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे राज्यस्तरीय या दीर्घकालिक राजनीतिक गठबंधन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
स्थानीय स्तर पर बने इस अप्रत्याशित राजनीतिक मेल ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है और आने वाले चुनावों में इसके असर पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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