
नई दिल्ली । रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (Royal Challengers Bengaluru) के लिए कई यादगार पारियां खेलने वाले विराट कोहली (Virat Kohli) और एबी डिविलियर्स (AB de Villiers) की दोस्ती क्रिकेट जगत में काफी चर्चित रही है। इंडियन प्रीमियर लीग (Indian Premier League) में दोनों खिलाड़ियों ने लंबे समय तक एक साथ खेलते हुए अपनी बल्लेबाजी से दर्शकों का मनोरंजन किया। मैदान पर चौकों और छक्कों की बारिश करने वाली इस जोड़ी का रिश्ता क्रिकेट (Cricket) तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समय के साथ दोनों के बीच गहरी दोस्ती (Friendship) भी विकसित हुई। अब डिविलियर्स ने विराट कोहली को पहली बार देखने के बाद उनके बारे में बनी अपनी शुरुआती धारणा का खुलासा किया है।
एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान डिविलियर्स से पूछा गया कि जब उन्होंने पहली बार विराट कोहली को देखा था, तब उनके मन में भारतीय बल्लेबाज को लेकर कैसी छवि बनी थी। इस सवाल के जवाब में दक्षिण अफ्रीका के पूर्व क्रिकेटर ने स्वीकार किया कि शुरुआती दौर में उन्हें विराट कुछ घमंडी और मगरूर स्वभाव के खिलाड़ी लगते थे।
हालांकि, उन्होंने यह बात हंसते हुए कही और स्पष्ट किया कि उनके बयान को पूरी तरह गंभीर टिप्पणी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।डिविलियर्स ने बातचीत में यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि विराट कोहली भी उनकी इस शुरुआती धारणा से सहमत हो सकते हैं। उनके अनुसार, युवा विराट के व्यक्तित्व में आत्मविश्वास काफी अधिक था। उस समय उनकी उम्र लगभग 19, 20 या 21 साल थी और वह अपने खेल को लेकर बेहद आश्वस्त नजर आते थे। डिविलियर्स की टिप्पणी का मुख्य संदर्भ विराट के शुरुआती करियर में दिखाई देने वाला यही आत्मविश्वास था।
उन्होंने समझाया कि किसी युवा खिलाड़ी के लिए शीर्ष स्तर पर अपनी जगह बनाना आसान नहीं होता। इसके लिए प्रतिभा के साथ खुद पर भरोसा होना भी जरूरी है। विराट कोहली में कम उम्र से ही यह विशेषता दिखाई देती थी। हालांकि, कई बार किसी व्यक्ति का मजबूत आत्मविश्वास दूसरों को घमंड या जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वास जैसा लग सकता है। डिविलियर्स के मुताबिक, विराट के व्यक्तित्व को समझने के लिए उस समय उनकी उम्र और करियर के शुरुआती दौर को ध्यान में रखना जरूरी है।
विराट कोहली ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी पहचान स्थापित करने के दौरान आक्रामक रवैये और प्रतिस्पर्धी मानसिकता के लिए भी ध्यान खींचा। मैदान पर उनका जोश, अपनी क्षमता पर विश्वास और विरोधियों के सामने चुनौती पेश करने का अंदाज उनके खेल का अहम हिस्सा रहा है। डिविलियर्स की टिप्पणी भी इसी शुरुआती व्यक्तित्व से जुड़ी हुई थी। उन्होंने विराट के बारे में अपनी बात रखते हुए यह संकेत दिया कि युवा अवस्था में दिखाई देने वाले व्यवहार को हमेशा नकारात्मक अर्थ में नहीं लेना चाहिए।
समय के साथ विराट कोहली के व्यक्तित्व में आए बदलाव का जिक्र करते हुए डिविलियर्स ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ भारतीय बल्लेबाज एक खिलाड़ी और इंसान के रूप में अधिक परिपक्व हुए। उनके अनुसार, शुरुआती वर्षों में विराट के सामने खुद को साबित करने की चुनौती थी। इस वजह से उनका व्यवहार अधिक आक्रामक और कभी-कभी जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वासी दिखाई देता था। अनुभव बढ़ने के साथ उनके अंदाज में बदलाव आया।
डिविलियर्स और कोहली ने रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए कई सत्रों तक साथ खेला। इस दौरान दोनों ने एक-दूसरे के खेल को करीब से देखा और टीम के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी साझेदारियों और आपसी तालमेल ने दोनों को क्रिकेट प्रशंसकों के बीच लोकप्रिय बनाया। डिविलियर्स का यह बयान उनकी दोस्ती के साथ विराट के शुरुआती व्यक्तित्व और समय के साथ आए बदलाव को भी सामने रखता है।
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