
अग्रिबाण एक्सक्लूसिव…
सिंगल बेंच के 17 पेजी आदेश से भौचक नगर तथा ग्राम निवेश करेगा अपील, लसूडिय़ामोरी की बस स्टैंड के लिए आरक्षित जमीन पर 60 दिनों में देना पड़ेगी व्यावसायिक निर्माण की अनुमति
इंदौर से भोपाल तक जमीन मालिक को नहीं मिली थी मंजूरी
1981 में कोल्ड स्टोरेट निर्माण के लिए दी थी पंचायत ने अनुमति
2023 में दो रजिस्ट्रियों के माध्यम से खरीदी गई जमीन
हाईकोर्ट ने कहा- 20 साल से नहीं बना सके बस स्टैंड
मालिक बदल जाने से अनुमति खत्म नहीं हो जाती
नगर तथा ग्राम निवेश का कहना – मास्टर प्लान लगातार रहता है जारी
इंदौर, राजेश ज्वेल
हाईकोर्ट (High Court) की इंदौर (Indore) खंडपीठ ने अभी एक ऐसा आदेश पारित किया जिसमें यह कहा गया कि 01 जनवरी 2008 से लागू किया गया इंदौर का मास्टर प्लान (master plan) 31 मार्च 2021 को ही समाप्त हो गया। लसूडिय़ामोरी की एक जमीन पर व्यवसायिक अनुमति दिए जाने के मामले में सुनवाई करने के बाद हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने 17 पेज का यह आदेश जारी किया, जिसमें कुछ हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के प्रकरणों का भी हवाला देते हुए नगर तथा ग्राम निवेश को निर्देश दिए कि 60 दिनों में उक्त जमीन पर व्यवसायिक निर्माण की अनुमति यानी अभिन्यास मंजूर किया जाए। उक्त जमीन मास्टर प्लान में बस स्टैंड के लिए आरक्षित की गई है, जिसके चलते पहले विभाग ने और फिर शासन स्तर पर भी जमीन मालिक की अपीलें खारिज हो गई, उसके बाद हाईकोर्ट की शरण ली गई।
इस आदेश से भौंचक नगर तथा ग्राम निवेश विधिक राय लेने के साथ ही अपील भी कर रहा है। संयुक्त संचालक सुभाशीष बनर्जी से जब इस आदेश के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि इस बारे में महाधिवक्ता से राय ली जा रही है और वैसे भी नए मास्टर प्लान के अमल में आने तक पुराना यानी वर्तमान मास्टर प्लान लागू रहता है और उसी के मुताबिक अभिन्यास मंजूर किए जाते रहे हैं। 2021 का मास्टर प्लान अभी लागू है, जब तक कि नया प्लान नहीं आ जाता। इस विषय से जुड़े अन्य विशेषज्ञों का भी कहना है कि किसी भी शहर का मास्टर प्लान प्रोजेक्टेड पॉपुलेशन के आधार पर तैयार किया जाता है और 100 प्रतिशत उसकी समय सीमा में पूरा नहीं हो पाता यानी सतत इसकी प्रक्रिया चली रहती है। जैसे उदाहरण के लिए भोपाल का मास्टर प्लान 2005 तक के लिए ही बना था, मगर अभी भी लागू है। इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर भी पूर्व में यह स्थिति निर्मित हो चुकी है। अभी हालांकि 2045 के मास्टर प्लान पर काम चल रहा है। दूसरी तरफ इंदौर हाईकोर्ट की सिंगल बैंच ने जो आदेश अभी 05 फरवरी को जो आदेश मिसलेनियस पीटीशन नम्बर 4687/25 में राज बिसानी और अन्य विरुद्ध प्रदेश और अन्य को लेकर दिया है, उसमें बिन्दू क्रमांक 25 में यह कहा गया कि इंदौर का मास्टर प्लान, जो कि 01 जनवरी 2008 से लागू किया गया, वह 31 मार्च 2021 को समाप्त हो गया है। हालांकि 31 मार्च की तारीख भी कहां से और कैसे आई यह भी अभिभाषक समझने का प्रयास कर रहे हैं, क्योंकि इसकी बजाय 31 दिसम्बर 2021 होना था। हालांकि हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि जिस जमीन पर बस स्टैंड या पिकअप स्टेशन मास्टर प्लान में प्रस्तावित किया गया है उस पर बीते 20 सालों में इस तरह की कोई गतिविधि शासन द्वारा नहीं लाई गई और लसूडिय़ामोरी की उक्त जमीन, जिसका खसरा नम्बर 103/1 पैकी है और इसका क्षेत्रफल 0.498 हेक्टेयर, यानी कि 53604.42 स्क्वेयर फीट होता है, उस पर 1981 में कोल्ड स्टोरेज की अनुमति हासिल की गई थी, वह यथावत है क्योंकि जमीन मालिक बदल जाने से दी गई अनुमति नहीं बदलती। क्योंकि उक्त जमीन याचिकाकर्ता राज बिसानी ने 2023 में दो रजिस्ट्रियों के माध्यम से खरीदी और 1981 में कोल्ड स्टोरेज की अनुमति के साथ जमीन व्यवसायिक उपयोग के लिए परिवर्तित हो चुकी थी। दूसरी तरफ नगर तथा ग्राम निवेश के जानकारों का कहना है कि हाईकोर्ट के इस आदेश के मुताबिक तो पिछले 5 सालों में दी गई सभी अनुमतियां अवैध हो जाएगी और एक नया संकट खड़ा हो जाएगा, जिसके चलते इसकी अपील की जा रही है।