
इंदौर (Indore)। इंदौर हाई कोर्ट (Indore High Court) ने आजीवन कारावास की सजा (life sentence) काट रहे कैदी को बड़ी राहत दी है। जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस अनिल वर्मा की डिविजन बेंच ने ट्रायल कोर्ट के फैसले (Trial Court Judgment) को पलटते हुए कड़ी टिप्पणी की। हाई कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत को संदेह का लाभ देना चाहिए था. कैदी को संदेह का लाभ नहीं मिलने की वजह से जेल में 11 साल बिताने पड़े। जेल में रहते हुए ग्रेजुएशन की पढ़ाई (graduate studies) पूरी कर चुके कैदी को रिहाई करने का आदेश (order release of prisoner) जारी किया।
आजीवन कारावास काट रहे कैदी को हाईकोर्ट से राहत
हाई कोर्ट के वकील मनीष यादव ने बताया कि पुलिस ने हेमराज नामक व्यक्ति को 26 फरवरी 2012 को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के समय तंगहाली से हेमराज का परिवार गुजर रहा था. घटना वाले दिन हेमराज ने पत्नी ऋतु के साथ घर पर चाय पी थी. चाय पीने के बाद घर से सारंगपुर निकला था. रास्ते में हेमराज के भाई विनोद का फोन आया और बताया कि भाभी दरवाजा नहीं खोल रही हैं।
वापस घर लौटने पर हेमराज ने पाया कि पत्नी ने खुदकुशी कर ली है. पुलिस ने हेमराज और पिता सत्यनारायण, सास सीमाबाई के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कर जेल भेज दिया।
ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए रिहाई का आदेश
हाईकोर्ट में जिरह के दौरान ट्रायल कोर्ट की खामियां उजागर हुईं. ट्रायल कोर्ट ने जांच के कई बिंदुओं पर गौर ही नहीं किया था. घटना का कोई गवाह भी नहीं था. महिला के परिजनों ने भी दहेज मांगने का आरोप नहीं लगाया था. दंपती के बीच आपसी विवाद का भी खुलासा नहीं हुआ. हालांकि ट्रायल कोर्ट ने हेमराज के माता-पिता को छोड़ दिया था. लेकिन हेमराज को आजीवन कारावास की सजा सुना दी।
डिविजन बेंच ने अपील पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था. हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि हेमराज को तत्काल छोड़ा जाना चाहिए था. ट्रायल कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए आजीवन कारावास के कैदी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली।
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